11 दिन बाद गुमशुदा बाघिन को ढूंढने में बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन को मिली सफलता

अनोखा तीर, भोपाल। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कॉलर लगी मादा बाघिन को आज 12 जुलाई पार्क प्रबंधन ने ढूंढ निकाला। उल्लेखनीय है कि उक्त बाघिन की जीपीएस/वीएचएफ लोकेशन 1 जुलाई की दोपहर लगभग 2 बजे के बाद से प्राप्त नहीं हो रही थी।
पाँच दल द्वारा बाघिन के  खोजने का अभियान चलाया
लोकेशन प्राप्त न होने पर उसी दिन  से ही वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में पाँच सुरक्षा श्रमिकों एवं बीट गार्डों के दल द्वारा बाघिन के विचरण क्षेत्र में सघन गश्त एवं खोज अभियान चलाया गया, किंतु पूरे दिन के प्रयासों के बाद भी बाघिन का पता नहीं चल सका। अगले दिन से खोज अभियान को और अधिक व्यापक बनाते हुए पाँच-पाँच सदस्यों की तीन अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इन टीमों द्वारा विस्तृत क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन संचालित किया गया, परंतु प्रतिकूल परिस्थितियों/ लगातार बारिश के कारण बाघिन की लोकेशन प्राप्त नहीं हो सकी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं  मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक मध्य प्रदेश के मार्गदर्शन में क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व द्वारा एक विशेष खोज दल का गठन किया गया, जिसमें बांधवगढ़ के वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर तथा वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के डॉ. प्रशांत देशमुख को भी शामिल किया गया। खोज अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दो प्रशिक्षित हाथियों एवं उनके महावतों की सहायता ली गई तथा वीएचएफ सर्च हेतु रिसीवर एंटीना की संख्या एक से बढ़ाकर चार कर दी गई, ताकि रेडियोसिग्नल के आधार पर इसका लोकेशन पता किया जा सके। इस सर्च अभियान में ट्रैप कैमरा को सभी सम्भावित स्थानों पर लगाया गया था ताकि बाघिन के मूवमेंट को कैप्चर किया जा सके, लेकिन बाघिन कैमरे में कैद नहीं हो सकी। पदचिन्ह को ढूंढने का प्रयास जो काफी जोखिमपूर्ण होता है,  उसका सहारा लिया गया।
वर्षा के कारण कई बार खोज अभियान बाधित हुआ
लगातार हो रही वर्षा के कारण कई बार खोज अभियान बाधित हुआ, फिर भी सभी दलों ने निरंतर प्रयास जारी रखे। लगभग 100 वर्ग किलोमीटर  के वन क्षेत्र को सघनता से सर्च किया गया। आज डॉग स्क्वाड को भी सर्च अभियान में शामिल किया गया। ग्रामीणों के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं का भी विश्लेषण किया गया। अंतत: निडर खोजी दल ने सबसे पहले पदचिन्ह को ढूंढ निकाला। पदचिन्ह मिलने के बाद वहां हाथियों के दल को भेजा गया और आज रविवार 12 जुलाई को  कॉलर वाली मादा बाघिन को उसके होम रेंज में ही हाथी के माध्यम से सफलतापूर्वक सर्च कर लिया गया है। वह पूरी तरह से स्वस्थ्य एवं सुरक्षित है। इसका रेडियो कॉलर पूरी तरह से कार्य करना बंद कर चुका है।

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