-31 जुलाई को एमडी पद से रिटायर्ड हो रहें एचयू खान
गणेश पांडे, भोपाल। वन विकास निगम में नए एमडी की खोज शुरू हो गई है। निगम के प्रबंध संचालक का पद पीसीसीएफ स्तर के आईएफएस के लिए निर्धारित है। वैसे निगम के अध्यक्ष राम निवास रावत एपीसीसीएफ मोहन मीणा के लिए लॉबिंग कर रहें हैं। बावजूद इसके, विभाग में दो नामों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। इनमें पहला नाम 1993 बैच के आईएफएस मनोज अग्रवाल का है और दूसरा नाम 1995 बैच के बसवराज अन्नागिरी का है। विभाग के 70 फीसदी आईएफएस अफसरों का मानना है कि निगम के बेहतर आर्थिक सेहत के नजरिये से मनोज अग्रवाल को एमडी बनाया जाना उचित होगा। वैसे भी वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन और मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक डॉ.समिता राजौरा के बाद वरिष्ठता क्रम में मनोज अग्रवाल सबसे वरिष्ठ है।
मनोज अग्रवाल पर विभाग गंभीर
वन विकास निगम के मौजूदा प्रबंध संचालक एचयू खान का कार्यकाल 26 दिन शेष है। उनकी सेवानिवृत के बाद कौन एमडी बनेगा, इस पर विचार-मंथन शुरू हो गया है। चर्चा में अग्रवाल के नाम सबसे आगे है। सीनियरिटी और मेरिट के आधार पर 1993 बैच मनोज अग्रवाल को एमडी बनाने की चर्चा तेज हो गई है। लम्बे अरसे से मनोज अग्रवाल पीसीसीएफ कैंपा के साथ-साथ पीसीसीएफ वर्किंग प्लान का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। अब बदलाव होने कर वक्त है। पूरे महकमे में अग्रवाल की छवि वित्तीय प्रबंध एक्सपर्ट के रूप में है और वर्तमान में निगम वित्तीय संक्रमण के दौरे से गुजर रहा है। सीनियर आईएफएस अफसरों की राय है कि वन विकास निगम को वित्तीय संक्रमण काल से बाहर निकलने के लिए अग्रवाल को एमडी बनाना जरुरी भी है। उनका रिटायरमेंट जून 28 में है। यानि निगम को आर्थिक संकट से उबारने के लिए अग्रवाल को काम करने का पर्याप्त समय होगा। कैंपा प्राधिकरण में सीईओ का पद है, जिसमें एपीसीसीएफ स्तर के लिए है। ऐसे में अग्रवाल को सीनियर पोस्ट होने के नाते एमडी वन विकास निगम में पदस्थ करना भी आवश्यक है।
विभाष ठाकुर की हो सकती है वापसी.!
1991 बैच के आईएफएस विभाष ठाकुर की वापसी वन भवन में वापसी की भी चर्चा है। अभी वे वन भवन से बाहर अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति संस्थान के सीईओ पद पर पदस्थ है। निगम के वर्तमान वर्तमान एमडी एचयू खान के बाद मप्र में सबसे सीनियर आईएफएस अफसर है। चर्चा है कि छह महीने के लिए ठाकुर को प्रतिनियक्ति से बुलाकर निगम का एमडी बनाया जा सकता है। वे जनवरी में सेवानिवृत होंगे। यानि छह महीने बाद फिर से नए एमडी की तलाश शुरू हो जाएगी।
क्या सात साल बाद से एसएफआरआई लौटेंगे वासुदेवा
1992 बैच के आईएफएस अधिकारी प्रदीप वासुदेवा पीसीसीएफ राज्य वन्य जीव संस्थान जबलपुर में अगस्त 1999 बैच से पदस्थ हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि जंगल महकमे में एक धारणा बनी हुई है कि उनकी सनक पूर्ण कार्यशैली की वजह से विभाग ने मुख्य धारा से अलग सात साल से एसएफआरआई जबलपुर पदस्थ कर रखा है। लेकिन जबलपुर में उनके मातहत उनकी प्रशंसा करते है। सीनियर पीसीसीएफ उन्हें भोपाल बुलाकर निगम का प्रबंध संचालक या फिर पीसीसीएफ वर्किंग प्लान बनाया जाता है। कभी-कभी ऐसे स्वभाव के अफसर उल्लेखनीय कर जाते हैं। वासुदेवा कर कार्यकाल अक्टूबर 2027 तक रहेगा।
1995 बैच के अन्नागिरी पर गंभीर विभाग
जंगल महकमे में 1995 बैच के बसवराज अन्नागिरी नॉन कंट्रोवर्षीयल अफसर की है। पद के हथियाने के लिए अन्नागिरी मंत्रियों और मंत्रालय की परिक्रमा करते नहीं दिखे। विभाग की ओर से उन्हें जो भी दायित्व दिया, उस पर मन मारकर काम किया। वर्तमान में अन्नागिरी पीसीसीएफ वित्त एवं बजट के साथ-साथ एचआरडी और विकास जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं है। निगम के एमडी के लिए उनका नाम भी आगे बढ़ाया जा रहा है। अन्नागिरी का कार्यकाल जुलाई 28 तक रहेगा।





