बांध बनाने से नाराज आदिवासियों का 25 किमी पैदल मार्च

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-कलेक्टर ने बीच रास्ते पहुंचकर लिया ज्ञापन  
अनोखा तीर, हरदा। हरदा जिले में प्रस्तावित मोरण्ड-गंजाल सिंचाई परियोजना के विरोध में आदिवासी समुदाय ने शुक्रवार को पैदल मार्च निकाला। रहटगांव क्षेत्र से सैकड़ों ग्रामीण करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय कर हरदा की ओर बढ़े, जहां कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर-हरदा मार्ग पर उन्हें रोककर ज्ञापन लिया। जिले में प्रस्तावित मोरण्ड-गंजाल सिंचाई परियोजना के विरोध में आदिवासी समुदाय ने शुक्रवार को पैदल मार्च निकाला। रहटगांव क्षेत्र से सैकड़ों ग्रामीण करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय कर हरदा की ओर बढ़े, जहां कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर-हरदा मार्ग पर उन्हें रोककर ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर आदिवासी परिवारों का विस्थापन होगा और वे अपनी जमीन व जंगल से बेदखल हो जाएंगे। उनकी मांग है कि परियोजना को निरस्त किया जाए या जमीन के बदले जमीन दी जाए। आदिवासी नेता जय कुमार उइके ने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
महिलाएं भी पैदल मार्च में शामिल
संयुक्त कलेक्टर सतीश राय ने बताया कि जिले का एक गांव बोथी पूर्ण रूप से और दो अन्य गांव आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आएंगे। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेकर उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारियों के लिए एम्बुलेंस और पानी की व्यवस्था की गई थी तथा एनबीडीए अधिकारियों और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना से जुड़े सभी संशयों को दूर किया जाएगा। मोरण्ड-गंजाल परियोजना के तहत नर्मदापुरम जिले के मोरघाट के पास मोरण्ड नदी और हरदा जिले के जवरधा के पास गंजाल नदी पर बांध प्रस्तावित है। परियोजना से नर्मदापुरम, खंडवा और हरदा जिलों के 211 गांवों को पेयजल और 64,111 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलने का अनुमान है। 8 अप्रैल को वन एवं पर्यावरण विभाग से एनओसी मिलने के बाद परियोजना को गति मिली है। फिलहाल प्रशासन ने बैठक के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।

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