गोबर शिल्प को नई ऊंचाइयां दे रहे भोपाल के मास्टर आर्टिस्ट जितेंद्र राठोर

WhatsApp Image 2025-09-19 at 11.24.35 PM

अनोखा तीर, भोपाल। पारंपरिक गोबर शिल्प को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले मास्टर आर्टिस्ट गोबरशिल्पी जितेंद्र राठोर आज भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बन चुके हैं। वर्ष 1976 में भोपाल में जन्मे राठोर ने वाणिज्य प्रबंधन तथा वाणिज्य में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त कर अपनी विद्वत्ता को कला से जोड़ा और गोबर शिल्प को सशक्त, संगठित एवं व्यावसायिक स्वरूप प्रदान किया। लगभग सोलह वर्षों की निरंतर साधना तथा वर्ष 2019 से व्यावसायिक विस्तार ने उनके कार्य को नई दिशा दी। प्रारंभिक प्रेरणा सुरेश राठोर से मिली, जबकि उनकी माताजी से प्राप्त पारंपरिक ज्ञान और संस्कारों ने इस कला को नवाचार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज यह शिल्प उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक साधना बन चुका है। अपनी पत्नी पुष्पा राठोर के साथ मिलकर वे गोबर से 75 से 100 प्रकार के विविध शिल्पों का निर्माण कर रहे हैं। 25 से अधिक प्रशिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र, बुरहानपुर, भोपाल, विदिशा सहित कई स्थानों पर इस कला का प्रसार किया है। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्हें नियमित आदेश प्राप्त हो रहे हैं, जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली भी शामिल है। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान तथा क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान जैसी संस्थाओं में प्रशिक्षण देना उनके कार्य की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। पर्यावरण संरक्षण की भावना से प्रेरित उनके गोबर से निर्मित दीये, हवन सामग्री, मूर्तियाँ, तोरण, धार्मिक प्रतिमाएँ और स्मृति-चिह्न पूर्णत: पर्यावरण अनुकूल हैं। उपयोग के बाद भी ये प्रकृति के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं। ‘गो-पुत्रÓ सम्मान से अलंकृत राठोर ने वन मेला, लोकरंग और खजुराहो महोत्सव जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। वन मेले में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ स्टॉलÓ पुरस्कार प्राप्त हुआ तथा वर्ष 2026 के राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार हेतु उनका नामांकन इस क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान की औपचारिक स्वीकृति है। जितेंद्र कुमार राठोर का कार्य यह प्रमाणित करता है कि परंपरा, नवाचार और पर्यावरणीय चेतना का समन्वय हो तो लोक कला भी आत्मनिर्भरता और सतत विकास का प्रेरक माध्यम बन सकती है। उनका यह प्रयास निस्संदेह समाज और प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

Views Today: 26

Total Views: 26

Leave a Reply

error: Content is protected !!