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Friday, 23 October 2026
हरदा

आयकर अधिनियम 2025…

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 आयकर विभाग ने डिग्री कॉलेज में किया जागरुकता कार्यक्रम

अनोखा तीर, हरदा। आयकर कार्यालय हरदा द्वारा नए आयकर अधिनियम 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन डिग्री कॉलेज, हरदा के प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अनुज अरोरा, मुख्य आयकर आयुक्त, भोपाल के निर्देशन में तथा शशिकांत कुशवाहा, अपर आयकर आयुक्त रेंज-1 भोपाल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता देवेन्द्र गर्ग, आयकर अधिकारी बैतूल ने बताया कि आयकर अधिनियम एक गतिशील कानून है, जिसे देश की बदलती आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नियमित रूप से अद्यतन और संशोधित किया जाता है। उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम को आर्थिक परिवर्तन, राजकोषीय नीतियों और सरकारी प्राथमिकताओं के अनुरूप वार्षिक आधार पर परखा जाता है, जिससे यह अर्थव्यवस्था, व्यावसायिक वातावरण, मुद्रा दरों, आय स्रोतों और वैश्विक वित्तीय रुझानों में होने वाले बदलावों के अनुरूप बना रहे। उन्होंने बताया कि वर्तमान आयकर अधिनियम 1961 में अधिनियमित किया गया था और समय-समय पर वित्त अधिनियमों के माध्यम से इसमें संशोधन किए जाते रहे हैं। जुलाई 2024 के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने आयकर अधिनियम 1961 की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता बताते हुए इसे संक्षिप्त, सुस्पष्ट और समझने में सरल बनाने का उद्देश्य रखा था। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान अधिनियम में बिखरे प्रावधानों को एक स्थान पर समाहित कर अधिक स्पष्टता प्रदान करने का प्रयास किया गया है। अधिकांश बदलाव करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किए गए हैं। पूर्व वर्ष और निर्धारण वर्ष की परिभाषाओं के स्थान पर अब एक ही परिभाषा ‘कर वर्षÓ लागू की गई है। तालिकाओं और सूत्रों के माध्यम से अधिनियम को अधिक पठनीय और निश्चित बनाने का प्रयास किया गया है। विभिन्न कर अपराधों के लिए सजा में कमी करते हुए सश्रम कारावास के स्थान पर सामान्य कारावास का प्रावधान किया गया है तथा कई अपराधों के लिए केवल जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। नया आयकर अधिनियम वर्तमान आयकर अधिनियम 1961 की तुलना में लगभग आधा, सरल और सहज बनाया गया है। लैटिन शब्दों के स्थान पर सामान्य अंग्रेजी शब्दों का उपयोग कर इसे आम करदाताओं के लिए अधिक समझने योग्य बनाया गया है, जिससे स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा और कराधार में वृद्धि होगी। कार्यक्रम के दौरान वित्तीय विधेयक 2026 में प्रस्तावित बदलावों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकार, व्यापारी सहित आम करदाता, वाणिज्य विषय के छात्र-छात्राएं तथा डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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