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Sunday, 25 October 2026
हरदा

पांच दिन से नहरों में नहीं आया पानी, टेल एरिया के किसान परेशान

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अनोखा तीर, मसनगांव। जल संसाधन विभाग द्वारा तवा डैम से पानी कम किए जाने के कारण क्षेत्र की नहरें पिछले पांच दिनों से सूखी पड़ी हैं। इस स्थिति पर कोई भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे टेल क्षेत्र के किसानों को गेहूं और मक्का की फसलों में सिंचाई के लिए भारी जद्दोजहद करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि सोनतलाई सब डिवीजन के एसडीओ एवं कार्यपाली यंत्री को लगातार फोन लगाए जा रहे हैं, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने से सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। ग्राम के किसान नितेश पाटिल, पवन भायरे, अरविंद, पवन पाटिल सहित अन्य किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं और मक्का की फसल में तीसरा पानी देने की आवश्यकता है, लेकिन पिछले पांच दिनों से रेलवे लाइन से नीचे पानी नहीं आने के कारण नहर की स्थिति खराब बनी हुई है। पानी के अभाव में खेतों में खड़ी फसलों की समय पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानों के अनुसार तापमान बढ़ने से खेतों में नमी की कमी हो रही है, ऐसे में सिंचाई अत्यंत जरूरी है, लेकिन विभाग द्वारा नहर में पानी बंद किए जाने से सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहा है।
पहदगांव से नीचे पहले से ही नहीं आ रहा पर्याप्त पानी
सोनतलाई सब डिवीजन में पहदगांव शाखा के ऊपर जमी जलकुंभी के कारण पहले से ही पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं आ रहा था। अब विभाग द्वारा पानी बंद किए जाने से गहाल हेड पर ही नहर सूख पड़ी है। इससे गेहूं और मक्का बोने वाले किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा है और सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस संबंध में सोनतलाई सब डिवीजन के एसडीओ रोहन विलियम्स से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया।
रेवापुर में औसरा बंदी के बाद भी नहीं आई राहत
सोनतलाई सब डिवीजन के साथ-साथ रेवापुर सब डिवीजन में भी सुकरास से नीचे पानी नहीं आने से गेहूं और मक्का की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों ने बताया कि पिछले दस दिनों से नहर में पानी नहीं आने के कारण रबी सीजन की फसलों में सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानों की मांग पर विभाग द्वारा 7 फरवरी से सब डिवीजन में तीन दिन की औसरा बंदी लागू की गई थी, लेकिन इसके बावजूद नहर सूखी पड़ी हुई है। रेवापुर सब डिवीजन के एसडीओ मौसम पोर्ते द्वारा भी कॉल रिसीव नहीं करने से किसानों को नहर में पानी की स्थिति की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है, जिससे उनमें निराशा बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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