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Friday, 6 November 2026
नर्मदापुरम होशंगाबाद / नर्मदापुरम

सीतापुरा में 55 आदिवासी परिवारों की घर वापसी

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-सामाजिक समरसता और सनातन परंपरा का संदेश
-धर्मांतरण की समस्या के बीच रामकथा और संवाद से हुई घर वापसी
-भिलट देव धाम के महंत गोविंददास के प्रयासों से मजबूत हुआ सामाजिक सौहार्द
अनोखा तीर, सिवनी मालवा। ब्लॉक के सीतापुरा गांव में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है। यहां 55 आदिवासी परिवारों ने सामूहिक रूप से सनातन परंपरा की धारा में घर वापसी की। इस अवसर पर ऊंच-नीच, भेदभाव और सामाजिक दूरी को त्यागकर आपसी भाईचारे और मिल-जुलकर रहने का संदेश दिया गया, जिससे गांव में सौहार्द का वातावरण बना।
धर्मांतरण की पृष्ठभूमि और संवाद की पहल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ये परिवार पूर्व में ईसाई मत अपनाकर गांव में बने चर्च में नियमित रूप से जाने लगे थे। आदिवासी अंचल में धर्मांतरण की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा रही है। इसी पृष्ठभूमि में भिलट देव धाम के महंत गोविंददास ने गांव पहुंचकर परिवारों से व्यक्तिगत संवाद शुरू किया। उन्होंने उनकी सामाजिक, धार्मिक और भावनात्मक चिंताओं को समझते हुए विश्वास बहाली का प्रयास किया।
रामकथा के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव
घर वापसी अभियान के तहत क्षेत्र में पांच दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया, जिसमें संबंधित परिवारों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। रामकथा के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर संवाद हुआ, जिससे परिवारों का पारंपरिक आस्था से पुन: जुड़ाव मजबूत हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, इस आयोजन ने समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विधिवत घर वापसी और सामूहिक आयोजन
रामकथा के समापन पर गंगा जल और नर्मदा जल का आचमन कराते हुए सभी 55 परिवारों की विधिवत घर वापसी कराई गई। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी भाई-बहनों के साथ सामूहिक भोजन और कीर्तन का आयोजन भी किया गया। आयोजकों ने इसे सामाजिक जीवन की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और विश्वास को बल मिलता है।
महंत गोविंददास का दावा और घर वापसी अभियान
महंत गोविंददास ने कहा कि आदिवासी अंचलों में धर्मांतरण एक गंभीर सामाजिक विषय बनता जा रहा है, जिसका समाधान टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सांस्कृतिक जागरूकता से संभव है। उन्होंने दावा किया कि घर वापसी अभियान का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि लोगों को उनकी परंपरा, संस्कृति और मूल पहचान से जोड़ना है। उनके अनुसार, यह अभियान आगे भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से जारी रहेगा।
सामाजिक सौहार्द को मिली मजबूती
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस पहल से सीतापुरा गांव में आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द मजबूत हुआ है। आयोजकों ने सभी वर्गों से अपील की कि वे भेदभाव और ऊंच-नीच को त्यागकर मिल-जुलकर रहें और गांव के सामूहिक विकास में योगदान दें। यह घटना क्षेत्र में सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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