ग्राम पंचायत टेमागांव के शांतिधाम का कुंआ चोरी
-मनरेगा योजना के तहत लाखों की लागत से हुआ था निर्माण
सैकड़ों मजदूरों ने दिन रात मेहनत करके ग्राम पंचायत टेमागांव के शांतिधाम में एक कुएं का निर्माण किया था। जिसकी लागत भी ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपए की चुकाई गई थी। वर्तमान स्थिति में टेमागांव के इस शांतिधाम में कुएं का कोई अस्तित्व ही नहीं है। यह कुंआ चोरी हो गया या मुक्तिधाम के भूतों ने इस कुएं को गायब कर दिया यह एक खोज का विषय है।
नितेश गोयल, हरदा। ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए वर्षों पहले एक फिल्म ‘कुंआ चोरी हो गयाÓ आई थी। उसी तर्ज पर टिमरनी ब्लाक के ग्राम पंचायत टेमागांव में भी ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा योजना के तहत स्थानीय शांतिधाम में सार्वजनिक कूप निर्माण कराया गया था। जिसका वर्ककोड १७४३००३०१५/ डब्ल्यूसी/ २२०१२०३४४४७६९८ था। इसका निर्माण कार्य ४ दिसंबर २०१९ से प्रारंभ हुआ था, जो १० फरवरी २०२५ को मनरेगा की वेबसाईट पर पूर्ण होना बताया गया। इस सार्वजनिक कूप निर्माण में सैकड़ों मजदूरों द्वारा विभिन्न मस्टरोल के तहत कार्य करते हुए १ लाख ४९ हजार ७८८ की मजदूरी का कार्य भी किया गया था। तात्कालीन सरपंच श्रीमती रत्ना पति गणेश पटेल एवं सचिव सुभाष सैनी की निगरानी में यह सार्वजनिक कूप का निर्माण मनरेगा की वेबसाईट पर करवाया गया। इस कूप निर्माण में लगभग ४ लाख की राशि भी व्यय कर दी गई, लेकिन यह सारा कार्य कागजों पर ही हुआ। वास्तविक रुप से टेमागांव के इस शांतिधाम में कोई सार्वजनिक कूप का निर्माण हुआ ही नहीं। हमारे प्रतिनिधि ने जब टेमागांव के इस शांतिधाम का जायजा लिया तो यहां पर आज तक कुआं खुदाई के कोई भी प्रमाण दिखाई नहीं दिए। अनोखा तीर प्रतिनिधि द्वारा इस संबंध में ग्राम पंचायत टेमागांव में रहने वाले कई ग्रामीणों से भी इस कुआं निर्माण के संबंध में जानकारी प्राप्त की। लेकिन सभी ने आज तक शांतिधाम में कोई भी कुआं निर्माण होना नहीं बताया। जब ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव द्वारा कुएं का निर्माण कराया गया तो यह कुआं कहां गायब हो गया? इस संबंध में ग्राम पंचायत सहित जिला प्रशासन को तत्काल या तो शांतिधाम के भूतों के खिलाफ या अज्ञात चोरों के खिलाफ कुआं चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई जाना चाहिए या कागजों पर हुए इस सार्वजनिक कूप निर्माण की तत्काल जांच कर तात्कालीन सरपंच एवं सचिव पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाना चाहिए।

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