खेड़ीपुरा में श्रीराम कथा का द्वितीय दिवस

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-शिव-सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन, निष्ठा और विश्वास का संदेश
अनोखा तीर, हरदा। खेड़ीपुरा स्थित खेड़ापति मंदिर के समीप मुख्य मार्ग पर आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पं. विद्याधर उपाध्याय ने शिव-सती चरित्र प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को निष्ठा, विश्वास और रामभक्ति का गहन संदेश दिया। दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक चले प्रवचन में सैकड़ों श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा रस का पान करते रहे। कथा के दौरान पं. उपाध्याय ने प्रयागराज प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि महर्षि भारद्वाज द्वारा पूछे गए प्रश्न राम कौन हैं? के उत्तर में महर्षि याज्ञवल्क्य ने कहा था कि भगवान राम को केवल बुद्धि से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और निष्ठा से जाना जा सकता है। जिनके हृदय में राम के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है, वही राम तत्व को समझ पाते हैं। राम कथा को उन्होंने अज्ञान के नाश का माध्यम बताया, जो मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाती है। शिव-सती चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए पंडित जी ने रामचरितमानस की चौपाई—
एक बार त्रेता जुग माहीं।
संभु गए कुंभज ऋषि पाहीं।।
का भावार्थ समझाया। उन्होंने बताया कि त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ कुंभज ऋषि (अगस्त्य) के आश्रम में राम कथा सुनने गए, जहां ऋषि ने उनका विधिवत पूजन किया। किंतु माता सती द्वारा कथा श्रवण में पूर्ण निष्ठा न होने के कारण कथा का प्रभाव उनके हृदय में नहीं उतर सका। तुलसीदास के अनुसार जहां निष्ठा नहीं होती, वहां कथा फलदायी नहीं होती। राजू हरने ने बताया कि कथा में आगे माता सती द्वारा भगवान राम की परीक्षा लेने, भगवान शिव के समाधिस्थ होने, पिता दक्ष के यज्ञ में माता सती के अपमान तथा योगाग्नि से शरीर त्याग के मार्मिक प्रसंग सुनाए गए। इस घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव द्वारा यज्ञ विध्वंस और माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने का भावपूर्ण वर्णन किया गया। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठों की स्थापना होने की कथा ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। अंत में देवताओं की प्रार्थना से भगवान शिव के शांत होने का प्रसंग सुनाया गया। कथा के दौरान पं. उपाध्याय ने कहा, भगवान को जानने के लिए तर्क नहीं, समर्पण चाहिए और राम को पाने के लिए चतुराई नहीं, श्रद्धा चाहिए। उन्होंने राम कथा को अज्ञान के नाश का माध्यम बताते हुए कहा कि राम कथा सुनने का नहीं, जीने का विषय है जो जीवन में उतरे, वही कथा सफल है। इस अवसर पर मुख्य यजमान माखनलाल घागरे एवं भगत चंदेवा विशेष रूप से उपस्थित रहे। कथा स्थल ‘जय श्रीरामÓ के उद्घोषों से गूंजता रहा और भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन समिति से राजू हरने ने बताया कि श्रीराम कथा प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक आयोजित की जा रही है तथा 25 जनवरी को हवन, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण के साथ कथा की पूर्णाहुति होगी। आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीराम कथा का पुण्य लाभ लेने की अपील की है। कथा व्यास ने बताया कि आज के प्रसंग में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का दिव्य एवं प्रेरणादायी वर्णन किया जाएगा।

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