उज्जैन के आसमान पर उड़ेगी अभ्युदय मध्यप्रदेश की पतंग

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शहर के हर मोहल्ले में युवाओं के बीच सैकड़ों पतंगों का वितरण, विकसित मध्यप्रदेश का संदेश देंगी यह पतंग
अनोखा तीर, उज्जैन। विकास की नई उड़ान भरते मध्यप्रदेश में इस बार मकर संक्रांति पर अभ्युदय मध्यप्रदेश की पतंग उड़ान भरते नजर आएंगी। वैसे तो अभ्युदय मध्यप्रदेश प्रदेश सरकार द्वारा चलाएं जाने वाला एक अभियान हैं जो ग्रामोदय से अभ्युदय के नारे के साथ मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा प्रारंभ किया गया है। लेकिन इस वर्ष यह अभियान महाकाल की नगरी उज्जैन में कुछ अलग ही रंग बिखेरते नजर आएगा। गुजरात के अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की तर्ज पर मकर संक्रांति के दिन महाकाल बाबा की नगरी उज्जैन में अभ्युदय मध्यप्रदेश की पतंग उड़ान भरते आत्मनिर्भर विकसित मध्यप्रदेश का संदेश देते दिखाई देगी। आज मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन के हर मोहल्ले और चौक चौराहों पर युवाओं को अभ्युदय मध्यप्रदेश की पतंग के साथ देखा जा रहा था। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा अभ्युदय मध्यप्रदेश लिखी पतंगों का बड़े पैमाने पर वितरण किया गया। मुख्यमंत्री के उज्जैन कार्यालय में पतंग वितरण कार्य का अवलोकन करते हुए कार्यालय के विशेष कर्तव्य अधिकारी राजेश कुशवाहा ने बताया कि पूरे शहर के हर वार्ड में वार्ड प्रभारी तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से बड़ी संख्या में पतंगों का वितरण किया गया है। जिससे प्रदेश में विकास की नई उड़ान का संदेश देते यह अभ्युदय मध्यप्रदेश की पतंग पूरे आसमान पर नजर आएं। यह एक प्रतिकात्मक सन्देश वाहक अभियान भी है और हमारी पुरातन भारतीय परंपरा भी है। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाना एक मनोरंजक खेल कौशल तो है ही वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह महत्वपूर्ण है। पतंग उड़ाने से हमें सूर्य की ऊर्जा मिलती है जिससे शरीर में सक्रियता आती है और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा मिलती है। ज्यादातर सर्दी के मौसम में लोग घरों में ऊनी कपड़ों में दुबके रहते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार उत्तरायण में सूर्य की गर्मी ठंड के प्रकोप से होने वाली सर्दी, खांसी, फ्लू जैसे रोगों को समाप्त कर देती है। सूर्य की रोगनाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है तथा अपनी रश्मियों द्वारा सभी जीवों का स्वास्थ्य उत्तम रखता है। हमारे वेदों में सूर्य की पूजा को बहुत महत्व दिया गया है। प्राचीन ऋषि-मुनियों ने सूर्य की शक्ति प्राप्त करके प्राकृतिक जीवन व्यतीत करने का संदेश मानव जाति को दिया था। कई बार हम संशय में होते हैं कि हमारी पुरानी प्रथाएं और मनोरंजन के साधन वक्त के साथ उड़ गए। मगर कुछ ऐसे भी साधन हैं जो मनोरंजन के आकाश में आज भी उड़ते दिखाई देते हैं। ऐसा ही एक पर्व है मकर संक्रांति, जिससे कई क्ंिवदंतियां जुड़ी हैं। हर साल 14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक होता है। हिंदुओं के लिए सूर्य एक रोशनी, ताकत और ज्ञान का प्रतीक है। मकर संक्रांति के अर्थ में मकर शब्द राशि के नाम से ताल्लुक रखता है, वही संक्रांति का अर्थ है संक्रमण। यानी इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इन सभी महत्वों के साथ इस बार मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का एक और संदेश अभ्युदय मध्यप्रदेश के रूप में भी जुड़ने जा रहा है।

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