जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल !

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 खनन माफियाओं ने खोद डाली पहाड़ियां
– अनुमति की आड़ में बेइंतहा खुदाई
– सीमाकंन से होगा खनन का आंकलन
– जल्द विधानसभा में गूंजेगा यह मामला
जिले में खनन माफियाओं का मानों राज चल रहा है। बालू रेत, मुरूम, बोल्डर समेत अन्य खनिज संपदाओं को लूटा जा रहा है। जिसके जरिये मोटी रकम  उगाई जा रही है। इतने बड़े पैमाने पर हुआ खनन इस ओर ही इशारा कर रहा है। इन सबके बीच खदानों पर नियमों का पालन नगण्य है। जिसका कड़ाई से पालन कराने की दिशा में संबंधित खनिज विभाग पूरी तरह फेल नजर आ रहा है। यहां कार्रवाई के नाम पर महज औपचारिता दिखाई पड़ती है। जिस पर हरदा विधायक ने कड़ी प्रतिक्रिया देने के साथ ही पूरे मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही है।
अनोखा तीर, हरदा।  वर्तमान में पर्यावरण संरक्षण भारत का ही नहीं विश्व का सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है। पहाड़ों से पत्थर, नदियों से बजरी व रेत तथा खानों से पत्थर और गिट्टी समेत अन्य खनिज संपदाओं का दोहन बदस्तूर जारी है। जिसका सीधा असर पर्यावरण के साथ साथ नजदीकी कृषि भूमियों के अलावा ग्रामीण सड़कों पर भी देखने को मिल रहा है। देखा जाए तो तय सीमा तक खनन का खास दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन बेतहाशा व अंधाधुंध खनन व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। क्योंकि, गांव की सुंदर पहाड़ियां अब खाई में तब्दील हो रही है। गहरी खाईयों की वजह से पहाड़ों पर गौ-माताओं का विचरण भी ना के बराबर हो चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक असीमित खुदाई से पर्यावरण को बहुत नुकसान होता है। वहीं अति दोहन के चलते तापमान में वृद्धि तथा वर्षा की अनियमितता जैसे दुष्प्रभाव सामने आते हैं। इतना ही नही, विभिन्न जीव-जंतुओं का जीवन खत्म हो जाता है।  ऐसे में आवश्यक है कि जिले में अवैध खनन पर प्रभावी रोकथाम जरूरी है। यहां बताना होगा कि एक दिन पहले हीरापुर के ग्रामीणों ने मुख्यालय पर अवैध खुदाई की शिकायत की है। कहा कि हीरापुर पहाड़ी खसरा नंबर 138/1 की निष्पक्ष जांच की की मांग उठाई है। ग्राम सरपंच ने भी पूरे मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं मामले में जांच उपरांत दोषियों पर कार्रवाई की बात पर जोर दिया है। इस संबंध में खनिज अधिकारी से मोबाईल पर चर्चा करनी चाही लेकिन उनके अवकाश पर होने की वजह से बात नही हो पाई।
आरोप- मिलीभगत बगैर संभव नही
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष देवीसिंह परते ने कहा कि 4 जनवरी को घने कोहरे के बीच खुदाई कार्य चलता रहा। इसकी सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचने की जहमत तक नही उठाई। फलस्वरूप सुबह मौके पर गहरे गड्ढ़े और जगह तबाह करने के निशान थे। उन्होंनें आरोप लगाया कि बगैर मिलीभगत इतने बड़े पैमाने पर अवैध खुदाई मुमकिन नही है।
दिन ब दिन प्राकृतिक संपदा खुर्दबुर्द
देवीसिंह परते के मुताबिक हीरापुर, बागरूल और कुसिया  इन तीनों गांवों की मवेशियों के लिए गौचर भूमि का अता-पता नही है। क्योंकि, पहाड़ी व जंगल अवैध खुदाई की भेंट चढ़ गए हैं। ऐसी स्थिति आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में प्राकृतिक संपदा को खुर्दबुर्द करने के साथ साथ आजीविका पर भी गहरा घांव दिया है। यही हाल रहा तो हंडिया तहसील क्षेत्र के कई गांव गहरी खाई और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो जाएगा।

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