-पंचम दिवस श्रद्धा और संकल्पों से गूंजा
अनोखा तीर, टिमरनी। ब्रह्मकुमारीज द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महायज्ञ के पंचम दिवस पर श्रद्धालुओं को समुद्र मंथन के आध्यात्मिक रहस्य से ओतप्रोत किया गया। इस अवसर पर आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी नीलम दीदी ने सरल व गूढ़ उदाहरणों के माध्यम से बताया कि समुद्र मंथन वास्तव में मानसिक विचार-सागर का मंथन है, जिसमें संकल्पों के आधार पर ही अमृत अथवा विष की उत्पत्ति होती है। दीदी जी ने कौस्तुभ मणि बनने की विधि बताते हुए कहा कि कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर की गई साधना से आत्मा श्रेष्ठ बनती है। जैसे नीलकंठ बाबा ने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को स्वयं धारण कर लिया, उसी प्रकार हमें भी दूसरों की कमियों, कमजोरियों व दुखों को अपने भीतर समाकर सहनशीलता और करुणा विकसित करनी चाहिए। अवगुणों को अपने भीतर समाहित कर उन्हें परिवर्तित करना ही सच्चा मानसिक मंथन है। कार्यक्रम में अमृतपान की यात्रा का भावपूर्ण वर्णन किया गया तथा नववर्ष के उपलक्ष्य में श्रीकृष्ण-राधा की सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस पावन अवसर पर नववर्ष के लिए उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने व्यसन-मुक्त जीवन अपनाने की सामूहिक प्रतिज्ञा भी ली, जिससे संपूर्ण पंडाल सकारात्मक संकल्पों से गूंज उठा। दीदी जी ने श्रेष्ठ ज्ञान प्रदान करते हुए कर्मों की गहन गति का रहस्य समझाया तथा अभ्यास के दौरान प्रकृति, माता-पिता, समाज एवं विश्व के प्रति धन्यवाद के साथ क्षमा-याचना कर योगदान कराया। कार्यक्रम के अंत में 108 दीपों के साथ शिव भोले बाबा की महाआरती संपन्न हुई, जिसके साथ पंचम दिवस की कथा का विश्राम हुआ। कथा प्रांगण हेतु सहयोग प्रदान करने वाले रामकृष्ण बलवटे का आदरणीय दीदी द्वारा सम्मान भी किया गया। सम्पूर्ण आयोजन श्रद्धा, शांति, व्यसन-मुक्ति के संकल्प एवं आध्यात्मिक उमंग से परिपूर्ण रहा।
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