वितरण व्यवस्था पर सवाल….

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 मांग अनुरूप मिल रहा खाद, फिर भी किल्लत
– कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा – वितरण व्यवस्था फेल
केप्शन : खाद के लिए पहुंच रहे छोटे किसान
अनोखा तीर, हरदा। जिले में लंबे समय से खाद की किल् लत बनी हुई है। रबी-सीजन में बुआई के समय जहां डीएपी की कमी से किसानों को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया थाव् वहीं बुआई के बाद अब गेहूॅ की फसल में यूरिया खाद के लिए किसान रतजगा करने को विवश में है। विगत दो दिन की बात करें तो छोटे व मंझले किसान खाद के लिए रात में ही डीएमओ कार्यालय पहुंच रहे है। इतना ही नही, सुबह से महिलाएं भी खाद के लिए जद्दोजहद कर रही हैं। उन्हें लाइन में घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। इधर, कृषि विभाग का दावा है कि जिले में पर्याप्त खाद है। इस साल 46 हजार मिट्रिक टन यूरिया की डिमांड के मुकाबले अब तक 49988 मिट्रिक टन यूरिया बांट चुके हैं, जो कि कि डिमांड से 3 हजार 988 मिट्रिक टन ज्यादा है। यह भी कहा कि जिले में पर्याप्त खाद की व्यवस्था है। इन सबके बीच एक दिन पहले मंगलवार को पर्ची देकर एक  एकड़ प्रति बोरी यूरिया उपलब्ध कराया गया। वहीं बुधवार को डीएमओ कार्यालय पहुंचे करीब पौने 3 सौ किसानो को टोकन बांटे गए। जिन्हें गुरूवार को खदद देने क बात कही थी।
मक्का व गेहूॅ में बंपर खाद का इस्तेमाल
हर साल के बजाय इस साल खाद की भारी किल्लत देखने को मिली। जागरूक किसानों की मानें तो जिले में मक्का और गेहूॅ की फसल में बंपर खाद डाला जा रहा है। खासकर मक्का की फसल में 5 बोरी एकड़ तथा गेहूॅ में 3 बोरी प्रति एकड़ खाद डाले जाने की खबर है। इसके अलावा आगे के लिए भी स्टॉक का एक बड़ा कारण है। जबकि पहले ऐसी नौबत कभी नही देखी।
किसानों को उत्पादन डगमगाने का डर
इन तमाम उहापोह के बीच छोटे खातेदार तथा लघु सीमांत किसा पीसता नजर आ रहा है। खाद के लिए पहुंची रही भीड़ में अधिकांश वही किसान शामिल हैं। जो एक दिन पहले लाइन में खड़े होकर जैसे-तैसे खाद की व्यवस्था में जुटे हैं। इसकी मुख्य वजह खाद के अभाव में गेहूॅ के उत्पादन पर बुरा असर पड़ना है। इसलिए वे हर हाल में खाद हाथ करने के लिए लाइन में खड़े होने को भी तैयार हैं।

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