चार माह से नहीं मिली राशि

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-उधारी में डूबे समूह, मध्यान्ह भोजन बंद होने की आशंका
अनोखा तीर, मसनगांव। चार माह बीत जाने के बावजूद स्व सहायता समूहों को मध्यान्ह भोजन की राशि नहीं मिलने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। समूहों द्वारा संचालित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है। समूहों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले समय में मध्यान्ह भोजन बंद करना पड़ सकता है। समूहों की जिला अध्यक्ष सुनीता डोले ने बताया कि सितंबर माह से अब तक मध्यान्ह भोजन की राशि जारी नहीं की गई है। जिले के अधिकांश स्व सहायता समूह कर्ज में डूब चुके हैं। दिसंबर का आधा महीना बीत जाने के बाद भी प्रति माह मिलने वाली राशि चार माह में नहीं मिल पाई है। ऐसी स्थिति में शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराना समूह की महिलाओं के लिए बेहद कठिन हो गया है। अधिकांश समूह उधार लेकर विद्यार्थियों को भोजन करा रहे हैं। राशन की व्यवस्था तो किसी तरह हो जाती है, लेकिन गैस टंकी भरवाने के लिए साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है। समूह की प्रांतीय महामंत्री ममता वर्मा ने बताया कि शासकीय स्कूलों में दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की राशि लंबे समय से नहीं मिलने के कारण समूहों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चार महीनों से शासन द्वारा राशि जारी नहीं की गई है। मजबूरी में समूह की महिलाएं साहूकारों से कर्ज लेकर विद्यार्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले माह में समूह मध्यान्ह भोजन देना बंद करने को विवश होंगे। सितंबर से राशि नहीं मिलने के कारण जिले के सभी समूह कर्जदार हो गए हैं। जिला अध्यक्ष सुनीता डोले ने कहा कि समय पर भुगतान न होने से समूह की महिलाओं को लगातार कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। अधिकांश महिलाएं गरीब परिवारों से हैं, जिन्हें शासन की ओर से मिलने वाला मासिक मेहनताना उनके घर का खर्च चलाने में सहारा बनता है। लेकिन अब वही राशि समूह संचालन में लगानी पड़ रही है। तेल, मिर्च-मसाले और दाल जैसी सामग्री तो किराना दुकानों से उधारी में मिल जाती है, लेकिन गैस टंकी भरवाने के लिए या तो कर्ज लेना पड़ता है या घर की जमा राशि खर्च करनी पड़ रही है। समूह की महिलाओं और पदाधिकारियों द्वारा कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर राशन और नगद राशि का भुगतान समय पर करने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते समूह की महिलाएं छोटे बच्चों, गर्भवती एवं धात्री माताओं तथा विद्यार्थियों को कर्ज लेकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने को मजबूर हैं। जिले में स्व सहायता समूहों को भुगतान की प्रक्रिया जिला पंचायत के माध्यम से होती है। जिला पंचायत द्वारा जानकारी भोपाल भेजे जाने के बाद राशि समूहों के खातों में हस्तांतरित की जाती है। इस संबंध में जिला पंचायत के समन्वयक राजीव शुक्ला ने बताया था कि जिले से प्रक्रिया भेज दी गई है और भुगतान भोपाल से किया जाएगा।

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