मेहनत व लगन से मिली सफलता

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   मजदूर का बेटा बना लोको पायलट, परिवार में हर्ष
– दिन में पढ़ाई और रात को चौकीदारी करता था शुभम गौर
 मंजिल को पाने के लिए कड़ी मेहनत, लगन, समर्पण और निरंतर प्रयासों से लक्ष्य को साधा जा सकता है। क्योकिं, यही प्रयास व्यक्ति को मजबूत ,आत्मविश्वासी और परिपक्व बनाते हैं, जो कि असंभव को संभव करने, बाधाओं को दूर करने और जीवन में बड़े मुकाम को हासिल करने का एकमात्र विश्वसनीय रास्ता है। ऐसा ही एक मुकाम मजदूर रामकृष्णा गौर के बेटे शुभम ने हासिल किया है। दिन में पढ़ाई और रात में चौकीदारी कर पानतलाई का शुभम लोको पायलट बन गया है। जिससे परिवार समेत पूरे गांव में हर्ष है।
अनोखा तीर, हरदा। जिले के पानतलाई निवासी रामकृष्णा गौर का इकलौता बेटा शुभम लोको पालयट बन गया है। शुभम की सफलता पर परिवार समेत पूरा गांव गौरान्वित है। वहीं शुभम को मिली सफलता के बाद उसकी कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण भाव की चर्चा तेज हो गई है। चर्चा दौरान शुभम गौर ने बताया कि कक्षा दूसरी में पढ़ाई करता था, तब माता-पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। जैसे ही थोड़ा बड़ा हुआ तो माता-पिता ने बालागांव में रहने वाले बुआ रामसुखी गौर और फूफा रामकृष्ण गौर के यहां भेज दिया। जहां मैने बचपन से लेकर अब तक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान बुआ-फूफा के अलावा उनके बेटे मदन और प्रेम का भरपूर स्नेह मिला। इतना ही नही, दोस्तों और शुभचिंतकों ने भी हर मोड़ पर हिम्मत प्रदान की। तभी खर्चे की तंगी ना हो इसलिए रात में चौकीदारी का काम शुरू किया, ताकि पढ़ाई के साथ साथ दो पैसे जुटा सकूं। इसी के चलते कृषि विभाग में बतौर चौकीदार नाइट ड्यूटी की। यहां पर भी पढ़ाई करते समय ड्रायवर मुकेश बघेल एवं अनिल सर का भरपूर साथ मिला। रात्रि में छोट- मोटे काम के लिए उन्होंनें कभी मेरी पढ़ाई खराब नही होने दी।
बुआ-फूफा ने बेटे की तरह रखा ध्यान
शुभम गौर ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता समेत बुआ-फूफा और उनके दोनों बेटों को दिया। कहा कि बुआ-फूफा ने बचपन से बेटे की तरह ध्यान रखा। इस दौरान कभी यह महसूस नही होने दिया कि मैं अकेला हूं। हर कदम पर सहयोग और हिम्मत प्रदान की। फलस्वरूप में निरंतर आगे बढ़ता गया।
ओर सौंप दिया रूपयों से भरा एटीएम
शुभम ने बताया कि लोको पायलट की परीक्षा देने बंैगलोर गया था। इसकी यादें ताजा करते हुए शुभम ने कहा कि इसके लिए रूपयों की जरूरत पड़ी तो टिमरनी में रहने वाले दोस्त अनिकेत तिवारी ने रूपयों से लेस एटीएम सौंप दिया। कहा कि बेफिक्र होकर परीक्षा देने जाओ और जितने पैसा लगे उनका इस्तेमाल करो।

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