-किसानों के चेहरे मायूस, लागत के पड़ रहे लाले
अनोखा तीर, हरदा। जिले में मक्का किसानों की हालत खराब है, क्योंकि बेमौसम बारिश से जहां फसल खराब हो गई है। साथ ही किसानों को समय पर यूरिया खाद भी उचित दाम पर नहीं मिल रहा है। मक्का की नीलामी भी नमी के कारण बाधित हो रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और वे मजबूरी में अपना मक्का सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं। अगर यही हाल रहा तो किसानों की मेहनत पर पानी फिरना तय माना जा रहा है। बावजूद किसान अपनी नुकसानी की भरपाई करने में जुटे है। इतना ही नही किसानों के सामने आगामी रबी फसल की तैयारियों ने उनका बजट बिगाड़ रखा है। ऐसे में किसान शासन-प्रसाशन व मंडी प्रबंधन की ओर आशा भरनी नजरों से देख रहे हैं।
मंडी के सारे शेड फुल
मंडी में इनदिनों बंपर आवक है। सारे शेड़ ट्रालियों से लबालब भरे हैं। शेड़ के बाहर तक ट्रालियों की कतार लगी हुई है। हालात यह भी हैं कि किसानों को मंडी में रतजगा करने की मजबूरी बनी हुई हैं। एक कारण यह भी है कि मक्का खरीदने में व्यापारी ज्यादा रूचि नही ले रहे हैं। किसानों के मुताबिक मक्का के शेड़ मेंं खरीदी कछुआ चाल चन रही है।
किसान को वापस लौटना पड़ा
कृषक रत्नेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ में मक्का लगाई थी। जिस पर पहले मौसम की मार पड़ी। इसके बाद फसल को संभालने के लिये सारे जतन किए। जिस पर भारी लागत लगानी पड़ी। किंतु अंत में फसल कटाई के समय अपेक्षाकृत उत्पादन नही मिला। जिसके चलते तीनों ट्रालियां वापस ले जाना पड़ा। इन सबके बीच किसानों को मंडी में फसल विक्रय करने में पसीने छूट रहे हैं।
इधर, मंडी प्रबंधन का दावा
इन सबके बीच मंडी प्रबंधन ने दावा किया है कि मंडी में करीब 15 से 20 हजार बोरे की आवक है। जिसमें से हर रोज लगभग 10 हजार से अधिक बोरे की खरीदी की जा रही है। यह भी कहा कि मक्का की क्वालिटी के आधार पर भाव तय हो रहा है।
-राजेंद्र पारे, कार्यालय अधीक्षक
इनका कहना –
प्रशासन से बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई सुधार नही हो रहा है। जिसके चलते हजारों किसानों को खासकर मक्का किसानों को लाखों रूपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है, जो कहीं ना कहीं किसानों की आर्थिक तंगी का मुख्य कारण बना हुआ है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नही जब किसानों की केवल घाटे का सौदा साबित होनेद लगेगा। इसके लिये समय पर उचित कदम उठाना जरूरी है।
मोहन सांई, अध्यक्ष
जिला कांगेस कमेटी
पूरे प्रदेश में किसानों की हालत अत्यधिक खराब है। फसलों की लागत दिन ब दिन बढ़ रही है , लेकिन उपज के दाम संतोषप्रद नही है। यही वजह है कि प्रदेश का किसान कपास, मक्का, बीमा राशि, खाद-बीज और कर्जमाफी जैसे मुद्दें पर सड़क पर उतरने कोउ विवश हैं।
केदार शंकर सिरोही, प्रदेश अध्यक्ष
किसान कांग्रेस प्रकोष्ट
संपूर्ण खरीदी प्रक्रिया में केवल किसानों का शोषण किया जा रहा है। देश का भंडार भरने वाला किसान अपने अधिकारों से वंचित है। ये सब अधिकारी एवं व्यापारियों की मिलीभगत का परिणाम है। किसान कांग्रेस जिले के किसानों के हित की लड़ाई लड़ती रहेगी।
रविशंकर शर्मा, प्रदेश महासचिव
मप्र किसान कांग्रेस कमेटी
एक नजर में आवक
गेहूृ्ृ — 3305
चना — 643
सोयाबीन — 9564
मूंग — 109
मक्का — 7305
काटू चना — 1451
डालर चना — 126
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