-किसानों की फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
अनोखा तीर, मसनगांव। गांव में बेसहारा मवेशियों की संख्या एक बार फिर बढ़ने लगी है। पिछले महीने पंचायत ने कुछ मवेशियों को गौशाला पहुंचाया था, लेकिन बारिश के बाद कई किसानों ने अपने बांझ मवेशियों को सड़कों पर खुला छोड़ दिया। ये मवेशी रात में सड़कों पर बैठकर यातायात में बाधा पैदा कर रहे हैं, वहीं दिन में खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्राम के किसान आशीष छलौत्रे ने बताया कि करीब आधा दर्जन बेसहारा मवेशी रोज सड़कों से होते हुए खेतों में पहुंच जाते हैं और गेहूं व चना की फसल चर जाते हैं। ग्रामीण इन्हें रोज खदेड़कर गांव से बाहर करते हैं, लेकिन वे फिर वापस लौट आते हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों को दिनभर खेतों में रहकर रखवाली करनी पड़ रही है। दिन में तो किसी तरह इन्हें भगाया जाता है, लेकिन रात में भी ये खेतों में पहुंच जाते हैं, जिसके कारण किसानों को रात में भी खेतों तक जाना पड़ रहा है। ये मवेशी रात में या तो सड़कों पर बैठ जाते हैं या चौक-चौराहों पर जमघट लगा देते हैं, जिससे ग्रामीणों को रात के समय आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आसपास गौशाला न होने से बढ़ रही समस्या
क्षेत्र में आसपास गौशाला न होने के कारण भी बेसहारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई किसान दूध देना बंद कर चुके दुधारू पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते हैं। ऐसे मवेशी एक गांव से दूसरे गांव घूमते रहते हैं। कुछ किसान तो अपने वाहनों से भी मवेशियों को दूसरे गांव में छोड़ आते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
गौशाला में मवेशी छोड़ने पर देनी पड़ती है राशि
प्रदेश सरकार के निर्देश पर संचालित गौशालाओं में मवेशियों की देखरेख की जिम्मेदारी गौशाला संचालकों को दी गई है, लेकिन जिले की अधिकांश गौशालाओं में मवेशी छोड़ने पर पशु मालिक से राशि ली जाती है। इसी कारण कई किसान भुगतान से बचने के लिए मवेशियों को सड़क पर ही छोड़ देते हैं। इससे गांवों में अव्यवस्था तो बढ़ती ही है, साथ ही खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि शासन द्वारा संचालित गौशालाओं में नगद राशि अनिवार्य रूप से न ली जाए, बल्कि इसे विकल्प के रूप में रखा जाए ताकि पशुपालक अपने मवेशियों को सड़क पर बेसहारा छोड़ने के बजाय सुरक्षित रूप से गौशाला तक पहुंचा सकें।
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