पराली की समस्या का निदान

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-युवा वैज्ञानिक सुनेंशी, विनोद भोंगले, दामिनी को किया सम्मानित  
अनोखा तीर, भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में 52वीं बाल विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में जिला परिषद उच्च प्राथमिक पाठशाला, पंचाला चंद्रपुर महाराष्ट्र से सुनेंशी विनोद भोंगले, दामिनी सुभाष जनपल्लिवार, सहयोगी शिक्षिका कु.मोहिनी शामराव देशमुख प्रदर्शनी में आये लोगों को पर्यावरण अनुकूल बायोडिग्रेडेबल गमलों के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं कि किस प्रकार हम इन खेतों में बच्चे अवशेष जिन्हें पराली कहा जाता है एवं नारियल की जटाओं से बायोडिग्रेडेबल गमले बना सकते हैं और पॉलिथीन का उपयोग न कर इन गमलो का उपयोग कर पर्यावरण को संरक्षित कर सकते है।  पर्यावरण संस्कृति ट्रस्ट अध्यक्ष सुशील जैन ने पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन अनुसंधान बाबत युवा वैज्ञानिक टीम को सम्मानित किया। ज्ञात हो कि पराली/ पाली को जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत कठोर होकर उर्वरा शक्ति खो देती है। साथ ही बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े जलकर मर जाते हैं। भूमि अपनी उर्वरक शक्ति को खो देती है और भूमि बंजर हो जाती हैं। आज के समय में देश में वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या है।

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