सिराली गौशाला में लाखों का भ्रष्टाचार

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-10 महीनों में 9 लाख का भूसा, 4 लाख का सुदाना
-फिर भी गायें भूखी—पार्षद राहुल शाह के गंभीर आरोप
अनोखा तीर, सिराली। नगर परिषद सिराली में भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक खुलती जा रही हैं। निर्माण कार्यों, खरीदी और विकास योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप पहले से ही चर्चा में थे, लेकिन अब नगर की गौशाला में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने से प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। पार्षद राहुल शाह ने गौशाला संचालन में करोड़ों की योजनाओं के बीच लाखों रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गोमाता के नाम पर मोटी रकम खर्च दिखाकर अधिकारियों ने कागजों में भ्रष्टाचार का जाल बुन दिया है, जबकि जमीन पर गायों की हालत बदतर है।
सरकार की योजनाएं, पर जमीन पर बदहाली
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार लगातार गौ-संरक्षण और गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान जारी कर रही है। गोपालन, चारा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद सिराली की गौशाला में इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कहीं नजर नहीं आता। पार्षद राहुल शाह का कहना है कि सरकारी सहायता और नगर परिषद के बजट के बावजूद गौशाला की स्थिति दयनीय है, न चारा है, न पानी, न स्वास्थ्य व्यवस्था।
10 माह में 9 लाख का भूसा और 4 लाख का सुदाना
पार्षद शाह का आरोप है कि पिछले 10 महीनों में गौशाला के लिए 9 लाख रुपए का भूसा और लगभग 4 लाख रुपए का सुदाना खरीदा जाना दर्शाया गया है। इनके मुताबिक जब वे स्वयं निरीक्षण के लिए गौशाला पहुंचे, तो भूसे का कहीं अता-पता नहीं था। उन्होंने बताया कि केवल पिछले महीने ही लगभग 50,000 का भूसा खरीदा दिखाया गया, लेकिन गौशाला में उस मात्रा का भूसा मौजूद नहीं मिला। इससे साफ है कि खरीदी फर्जी बिलों के आधार पर दिखाई जा रही है।
गौशाला की वास्तविक स्थिति चिंताजनक
पार्षद के अनुसार गौशाला में न तो पर्याप्त चारा है, न स्वच्छ व्यवस्था, और न ही गायों के स्वास्थ्य की कोई उचित देखरेख। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार भूखे-प्यासे रहने से कई गायों की मौत भी हो चुकी है। वहीं कागजों में चारा और सुदाना की आपूर्ति रोजाना पर्याप्त दिखा दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गोमाता पर अत्याचार है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे अधिकारियों पर आती है।
गौशाला प्रभारी पर बड़े आरोप
पार्षद राहुल शाह ने गौशाला प्रभारी हरिओम गौर पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। चारे की मात्रा वास्तविक से कई गुना अधिक दिखाना, फर्जी बिल जोड़ना और जमीन पर खानापूर्ति करना इस घोटाले का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया है।
जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में रोष
स्थानीय नागरिकों और पशुप्रेमियों ने बताया कि गौशाला कई बार देखने पर भी बदहाल ही मिली—न पानी की टंकियां सुचारू, न चरनी में चारा, न कोई साफ-सफाई। इसके बावजूद हर महीने हजारों-लाखों रुपए खर्च दर्शाए जाते हैं। लोगों का कहना है कि गो-संरक्षण की आड़ में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
पार्षद ने कहा कि यह मामूली अनियमितता नहीं, बल्कि लाखों रुपए का भ्रष्टाचार है। इसलिए इसकी जांच वरिष्ठ अधिकारियों की टीम द्वारा कराई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी गौशाला जैसे संवेदनशील विषय पर भ्रष्टाचार करने की हिम्मत न कर सके।

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