हरदा-छिपानेर मार्ग पर बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड रेत के डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली

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-अवैध रेत का परिवहन भी जोरों पर, जिम्मेदारों की अनदेखी से बढ़ रहा खतरा
अनोखा तीर, करताना। हरदा-छिपानेर मार्ग पर इन दिनों रेत से भरे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली बेलगाम गति से दौड़ रहे हैं। इन भारी वाहनों की तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण मार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात बिना किसी रोक-टोक के रेत से भरे वाहन सड़कों पर धूल उड़ाते हुए गुजरते हैं, लेकिन प्रशासन और यातायात विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। बस स्टैंड चौराहा और आसपास के क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव होने के बावजूद इन ओवरलोड वाहनों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। शुक्रवार को ऐसी ही एक घटना हरदा-छिपानेर मार्ग पर देखने को मिली, जब छिपानेर की ओर से रेत लेकर आ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने साइड से गुजर रही एक कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का गेट और शीशे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। शीशा टूटने से कार चालक को चोट भी आई। बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो जाने से मामला पुलिस चौकी तक नहीं पहुंच सका।
अवैध रेत खनन और बिक्री का धंधा चरम पर
क्षेत्र में नर्मदा तट, छोटी छिपानेर और शमशाबाद क्षेत्र से अवैध रूप से रेत चोरी कर आसपास के गांवों में बेची जा रही है। नर्मदा नदी के अंदर से ट्रैक्टर-ट्रॉली में रेत भरकर खुलेआम परिवहन किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अवैध रेत से भरी ट्रॉलियों को फट्टों से ढककर गांव-गांव में 4500 से 5000 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से बेचा जा रहा है। यह पूरा कारोबार दिनदहाड़े चल रहा है, लेकिन प्रशासन और खनिज विभाग की टीमों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अवैध रेत परिवहन के कारण सड़कों की हालत भी खराब हो रही है और धूल के कारण राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ओवरलोड और अवैध रेत ढोने वाले वाहनों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लगे और अवैध कारोबार पर लगाम कसी जा सके।

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