राष्ट्र आराधना का बीज मंत्र है राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरमÓ :  राजेन्द्र तिवारी

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अनोखा तीर, हरदा। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर, गुलजार भवन, हरदा में राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरमÓ की 150वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, मातृभूमि के प्रति गौरव भाव और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को सशक्त करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी और अभिभावक पूनम बिश्नोई रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद भारत माता और मां सरस्वती के चित्रों पर दीप प्रज्वलन एवं वंदना की गई। मंचस्थ अतिथियों का परिचय उपरांत विद्यालय के भैया-बहनों ने पारंपरिक रूप से तिलक लगाकर और श्रीफल भेंट कर उनका स्वागत किया। संस्था प्राचार्य राजेन्द्र प्रसाद तिवारी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि वन्दे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना का अमर मंत्र है। यह राष्ट्र आराधना का बीज मंत्र है, जो हर भारतीय के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण और गौरव की भावना जगाता है। उन्होंने बताया कि यह गीत सन 1875 में रचा गया था और 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसे सस्वर प्रस्तुत किया था। उसी क्षण से यह गीत भारत की स्वतंत्रता चेतना का प्रतीक बन गया। उन्होंने आगे कहा कि ‘वन्दे मातरम्Ó भारत माता के विराट स्वरूप का दर्शन कराता है और यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाला अमर गीत है। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन वरिष्ठ आचार्य वीरेन्द्र साकल्ले ने किया। अंत में सभी विद्यार्थियों, आचार्यों और अतिथियों ने एक स्वर में वन्दे मातरम का सामूहिक गायन कर भारत माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

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