-रात में हल्की सर्दी, दिन में पंखे चल रहे
अनोखा तीर, मसनगांव। नवंबर माह को पारंपरिक रूप से सर्दी की शुरुआत माना जाता है, लेकिन बीते दो-तीन वर्षों से इस महीने में ठंड का विशेष अहसास नहीं हो पा रहा है। इस वर्ष भी लंबी बारिश के बावजूद ठंड में कमी बनी हुई है। सामान्यत: इस समय लोग गर्म कपड़ों का उपयोग शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार दिन में गर्मी के कारण लोग अब भी गर्म कपड़ों से दूरी बनाए हुए हैं। रात के समय हल्की ठंड महसूस होती है, जबकि दिन में पंखे चलाने की नौबत आ रही है। कंबल और रजाई भी अब तक अलमारियों से बाहर नहीं आए हैं।
दिन छोटे, रातें लंबी हुईं
नवंबर माह में मौसम भले ही कम ठंडा हो, लेकिन दिन छोटे और रातें लंबी होने लगी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार 21 या 22 जून के आसपास सूर्य दक्षिणायन होता है, जिसके कारण धीरे-धीरे रातों की अवधि बढ़ने लगती है और दिन छोटे हो जाते हैं। सर्दी का मौसम शुरू होते ही लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो जाते हैं, जिसके चलते सुबह मॉर्निंग वॉक करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।
अच्छी सर्दी की आस, फसलों के लिए जरूरी ठंड
जिले में रबी सीजन की फसलों की बुवाई सामान्यत: अक्टूबर से शुरू हो जाती है, लेकिन इस वर्ष देर तक वर्षा होने से बुवाई का कार्य नवंबर के पहले सप्ताह में आरंभ हुआ। माना जाता है कि लगभग 15 नवंबर तक ठंड बढ़ने से गेहूं, चना जैसी रबी फसलों का विकास बेहतर होता है। पिछले दो वर्षों से नवंबर में ठंड कम रहने से फसल उत्पादन पर असर पड़ा है और किसानों को सिंचाई भी जल्दी करनी पड़ी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। किसानों का मानना है कि जितनी लंबी ठंड रहेगी, फसल उतनी अच्छी होगी। कृषि वैज्ञानिक ओ.पी. भारती ने बताया कि खेत में नमी देखकर ही बुवाई करें और अधिक गीलापन हो तो बतर आने दें। गेहूं और चने की फसल के लिए विटावेक्स पावर (300 ग्राम प्रति क्विंटल) या कार्बेन्डाजिम-मैनकोजेब से सीड ट्रीटमेंट करने की सलाह दी। फफूंद रोकने के लिए 50 किलो गोबर खाद में 3 लीटर ट्राइकोडर्मा मिलाकर खेत में छिड़कें। गेहूं की फसल को जड़महू से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 48 प्रतिशत या थायोमेथोक्जाम 30 एफएस 1 लीटर प्रति क्विंटल की दर से उपयोग करने की सलाह दी। वहीं मक्का की फसलों में फॉल आर्मी वर्म जैसी इल्लियों को रोकने के लिए प्रति एकड़ छह फेरोमोन ट्रैप लगाने की बात कही गई।
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