लम्पी वायरस से बचाव के लिए पशुओं का कराएं टीकाकरण

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-बीमार पशुओं को अलग रखें, कराएं उपचार
अनोखा तीर, हरदा। प्रदेश के झाबुआ, रतलाम, बैतूल, बड़वानी, सिवनी, सागर एवं भोपाल जिलों से पशुओं में लम्पी स्किन डिसीज़ की जानकारी मिली है। इस संबंध में पशुपालन विभाग द्वारा लम्पी वायरस से बचाव एवं रोगग्रस्त पशुओं के उपचार के संबंध में एडवाइजरी जारी की है। संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पीएस. पटेल ने बताया कि इस रोग से बचाव के लिए पशुओं को प्रतिबंधात्मक टीका अवश्य लगवाएं। पशुपालक अपने पशुओं में लम्पी स्किन डिसीज के लक्षण दिखाई देने पर निकटतम पशु औषधालय/पशु चिकित्सालय से तत्काल संपर्क कर बीमार पशुओं का उपचार कराएं। स्वस्थ पशुओं को बीमार पशुओं से अलग रखें। स्वस्थ पशुओं का टीकाकरण कराएं। पशु रखने के स्थान की सफाई रखें एवं पशुओं के शरीर पर परजीवी जैसे किल्ली, मक्खी, मच्छर आदि को नियंत्रित करने के उपाय करें।
डॉ. पटेल ने बताया कि पशुपालन विभाग द्वारा लम्पी वायरस की चुनौती से निपटने के लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। संक्रमण से बचाव के लिए टीकों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है, मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है एवं पशु पालकों को रोग से बचाव के संबंध में आवश्यक परामर्श दिया जा रहा है। प्रदेश में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा माह अप्रेल 2025 से कुल 41.5 लाख पशुओं को एल.एस.डी. रोग प्रतिबंधात्मक टीका लगवाया जा चुका है। मुफ्त टीकाकरण कार्य निरंतर जारी है।
लम्पी स्किन डिसीज़
लम्पी पशुओं में होने वाली एक वायरस जनित बीमारी है, जो कि संक्रामक होती है। यह बीमारी मुख्यत: गो-वंशीय पशुओं में वर्षा के दिनों में फैलती है। इस रोग की शुरूआत में हल्का बुखार दो से तीन दिन के लिये रहता है, उसके बाद पूरे शरीर की चमड़ी में गठानें निकल आती हैं। ये गठानें गोल उभरी हुई आकृति की होती हैं। इस बीमारी के लक्षण मुंह, गले, श्वास नली तक फैल जाते हैं, साथ ही पैरो में सूजन, दुग्ध उत्पादकता में कमी, गर्भपात, बांझपन और कभी -कभी मृत्यु भी हो जाती है। यह रोग मच्छर, काटने वाली मक्खी एवं किल्ली आदि से एक पशु से दूसरे पशुओं में फैलती है। अधिकतर संक्रमित पशु 2-3 सप्ताह में ठीक हो जाते है, किन्तु दूध की उत्पादकता में कमी कुछ समय बनी रह सकती है।
राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम
पशुपालन विभाग द्वारा लम्पी स्किन बीमारी की रोकथाम एवं निगरानी हेतु भोपाल में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है, जिसका दूरभाष नंबर 0755-2767583 है। कोई भी पशुपालक इस पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकता है। संचालनालय स्तर से जिलों के समस्त अधिकारियों को रोग के प्रति सजग रहने एवं केन्द्र सरकार की गाइड लाइन का पालन करने के लिए निर्देशित किया गया है।

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