-पति अधर गुप्ता पर 170 पन्नों का आरोप पत्र
– बालाघाट वन विभाग में विवादों की जद में दोनों अधिकारी, शासन ने मांगा स्पष्टीकरण
गणेश पांडे, भोपाल। मध्य प्रदेश शासन ने उत्तर बालाघाट डीएफओ वनमंडल अधिकारी नेहा श्रीवास्तव को दुर्भावना से प्रेरित होकर की गई कार्रवाई के आरोप में नोटिस जारी किया है। यह नोटिस वन विभाग के एक टेंडर विवाद से जुड़ा है। इससे पहले शासन ने उनके पति और दक्षिण बालाघाट डीएफओ अधर गुप्ता के खिलाफ 170 से अधिक पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र जारी किया है।
क्या है पूरा मामला
वन सुरक्षा समिति लामता के अध्यक्ष शत्रुघन असाटी ने डीएफओ नेहा श्रीवास्तव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2025-26 में भवन, वानिकी और अन्य निर्माण कार्यों के लिए सामग्रियों की खरीद हेतु एमपी टेंडर पोर्टल पर 5 जून 2025 को निविदा जारी की गई थी। इसमें बिड खोलने की तारीख 19 जून 2025 तय की गई थी, लेकिन बिड खुलने के बाद 26 जून को निविदा निरस्त कर दी गई। उसी दिन डीएफओ नेहा ने शिकायतकर्ता असाटी को अध्यक्ष पद से हटाने का नोटिस जारी कर दिया। राज्य शासन ने इसे दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई मानते हुए कहा कि यह कदम संयुक्त वन प्रबंधन संकल्प 22 अक्टूबर 2001 की भावना के खिलाफ है। शासन ने नेहा श्रीवास्तव को निर्देश दिया है कि वे 7 दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण दें, अन्यथा उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा अनुशासन एवं अपील नियम, 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, शासन ने अब नेहा श्रीवास्तव को भी आरोप पत्र जारी करने पर विचार शुरू कर दिया है।
डीएफओ अधर गुप्ता पर गंभीर आरोप
राज्य शासन ने दक्षिण बालाघाट डीएफओ अधर गुप्ता के खिलाफ 170 से अधिक पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र जारी किया है। इसमें उनके कार्यकाल के दौरान वन्यजीव संरक्षण, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक कार्यों में गंभीर लापरवाही का उल्लेख है।
मुख्य आरोपों में शामिल हैं
वन्यजीव सुरक्षा में विफलता : डीएफओ के कार्यकाल में लालबर्रा क्षेत्र के बहियाटिकुर बीट में एक बाघ की संदिग्ध मौत और अवैध दाह संस्कार का मामला सामने आया। आरोप है कि गुप्ता ने बिना वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए बाघ का शव जलाने की अनुमति दी।
आरोपियों को भागने दिया : इस प्रकरण के आरोपी वनपाल टिकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे उनके सामने उपस्थित हुए थे, लेकिन डीएफओ ने उन्हें पुलिस को नहीं सौंपा, जिसके बाद वे फरार हो गए।
कर्तव्य में लापरवाही : अधर गुप्ता पर अधीनस्थों पर नियंत्रण न रखने, सूचना तंत्र की कमजोरी और योजनाबद्ध ढंग से कार्य न करने का भी आरोप है।
प्रशिक्षण मॉड्यूल में लापरवाही : वनक्षेत्रपाल महाविद्यालय बालाघाट में अनुदेशक रहते हुए उन्हें प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने और मॉड्यूल विकसित करने का कार्य सौंपा गया था, लेकिन उन्होंने समय सीमा में कार्य पूरा नहीं किया।
वित्तीय अनियमितता : 2021-22 में काटी गई बांस की बिक्री से जुड़ी 1,02,967/- की राशि का भुगतान विलंबित करने का आरोप है। उनके कारण यह भुगतान समाधान ऑनलाइन में दर्ज होने के बाद देरी से किया गया। सूत्र बताते हैं कि वन मुख्यालय ने अधर गुप्ता को निलंबित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है, हालांकि अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।
वन विभाग में हड़कंप
डीएफओ नेहा श्रीवास्तव का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। कुछ समय पहले उन्होंने कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर 2-3 पेटी अड़ी डालने का गंभीर आरोप लगाया था। इस बयान के बाद वे सुर्खियों में आईं और विभागीय जांच के दायरे में भी आईं। अब शासन द्वारा पति-पत्नी दोनों अधिकारियों पर कार्रवाई से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी वर्ग का कहना है कि यदि दोनों पर दोष सिद्ध होता है, तो उन्हें सेवा से निलंबित किया जा सकता है।
आगे क्या होगा
राज्य शासन ने नेहा श्रीवास्तव से सात दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं अधर गुप्ता के खिलाफ पहले से जारी आरोप पत्र की जांच चल रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों मामलों में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और एसीएस स्तर पर समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी।
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