-स्वामीनारायण संप्रदाय के 111 संतों का पदार्पण हुआ
अनोखा तीर, हरदा। नगर में कल स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़े 111 संतों का ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक आगमन हुआ। यह दिव्य संत यात्रा कच्छ कड़वा पाटीदार समाज भवन में संपन्न हुई। जहां सर्व समाज के नागरिकों ने संतों का श्रद्धा और भक्ति भाव से स्वागत एवं सम्मान किया। संत समागम के इस कार्यक्रम का संचालन उत्तम विवेक स्वामी जी ने किया। उन्होंने मंचासीन संतों का परिचय करवाते हुए स्वामीनारायण संप्रदाय और उसकी बीएपीएस संस्था बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उत्तम स्वामी जी ने बताया कि स्वामीनारायण संप्रदाय एक वैष्णव भक्ति परंपरा है। जिसकी स्थापना 18वीं सदी में भगवान स्वामीनारायण ने की थी। यह संप्रदाय अक्षर पुरुषोत्तम दर्शन पर आधारित है जो वेदों, उपनिषदों और भगवद्गीता के गूढ़ सिद्धांतों को व्यवहारिक जीवन में अपनाने की शिक्षा देता है। संप्रदाय का उद्देश्य मानव जीवन में भक्ति, सेवा, सदाचार और आत्मशुद्धि के मार्ग को प्रशस्त करना है।
बीएपीएस संस्था विश्वभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक जागृति के क्षेत्र में कार्य कर रही है। दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर और अबू धाबी में निर्मित हो रहा भव्य मंदिर इस संस्था की वैश्विक पहचान और समर्पण भावना का प्रतीक हैं। उन्होंने आगे बताया कि स्वामीनारायण संप्रदाय में संत बनने की प्रक्रिया अत्यंत अनुशासित और शिक्षित है। एक संत बनने के लिए सात वर्षों का प्रशिक्षण आवश्यक होता है। प्रारंभिक तीन वर्ष शैक्षणिक कार्यक्रम और परीक्षाओं में व्यतीत होते हैं, तत्पश्चात दीक्षा दी जाती है। फिर तीन वर्ष और प्रशिक्षण देकर उन्हें धर्म प्रचार, सेवा, शिक्षा और मानव कल्याण के कार्यों हेतु विश्वभर के मंदिरों में भेजा जाता है। संतों ने अपने प्रवचनों में कहा कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता, सदाचार और सेवा भावना को सर्वोपरि रखता है। इस अवसर पर कच्छ कड़वा पाटीदार समाज की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। नगर के प्रतिष्ठित नागरिकों, उद्योगपतियों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। हरदा के प्रमुख उद्योगपति एवं समाजसेवी नटवर पटेल ने कहा कि हरदा के इतिहास में यह आयोजन एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अवसर है। इतने बड़ी संख्या में स्वामीनारायण संप्रदाय के शिक्षित संतों का आगमन नगर के लिए आध्यात्मिक सौभाग्य है। उनके प्रवचनों ने हर नागरिक के हृदय में धार्मिक चेतना, एकता और सद्भाव का भाव जाग्रत किया है। यह आयोजन हरदा को धर्म, संस्कृति और समाजसेवा के संगम स्थल के रूप में एक नई पहचान देता है।

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