नर्मदापुरम वनमंडल में 2 करोड़ से अधिक की नुकसानी पर डीएफओ बेदाग,16 पर कार्रवाई

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-हॉफ ने डीएफओ की जिम्मेदारी फिक्स करने सीसीएफ को दिया अल्टीमेटम
गणेश पांडे, भोपाल। नर्मदापुरम वनमंडल के इटारसी परिक्षेत्र के छिपीखापा में ताखु प्रजाति के दुर्लभ सागौन पेड़ों की अवैध कटाई से दो करोड़ से अधिक की नुकसानी के मामले में सीसीएफ अशोक कुमार ने छोटे 16 कर्मचारियों और अधिकारियों पर आरोप पत्र जारी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। दिलचस्प पहलू यह है कि सीसीएफ कुमार ने डीएफओ मयंक गुर्जर को बेदाग माना है। हालांकि हॉफ एवं पीसीसीएफ वीएन अंबाड़े ने सीसीएफ कुमार को इतनी बड़ी नुकसानी में डीएफओ की भी जवाबदेही फिक्स करने का अल्टीमेटम दिया है।  रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों और बीट वनकर्मियों ने गश्त और गणना नहीं की, जिससे लकड़ी तस्कर लगातार सक्रिय रहे। इसके कारण अवैध कटाई से वन विभाग को ढाई करोड़ के लगभग राजस्व हानि हुई। इस मामले में मुख्य वनसंरक्षक अशोक कुमार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई के आदेश देते हुए लिखा है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उनके खिलाफ सख्त विभागीय दंड की प्रक्रिया जारी रहेगी। सभी से 15 दिन में जवाब तलब किया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबन और वेतनवृद्धि रोके जाने की कार्रवाई की जाएगी।
इन पर लटकी तलवार
सीसीएफ अशोक कुमार ने बड़े ही सुनियोजित तरीके से डीएफओ को कार्रवाई से बचाते हुए एसडीओ समेत 16 वन कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। जिन्हें आरोप पत्र दिए हैं उनमे एसडीओ मान सिंह मरावी, एसडीओ नर्मदापुरम, महेंद्र कुमार गौर, एसडीओ रहे जगदीश प्रसाद बौरासी, प्रभारी डिप्टी रेंजर,  वनक्षेत्रपाल हरिओम मनु और श्रेयांस कुमार जैन, तत्कालीन वनपाल, सहायक पांडरी परिक्षेत्र शिवकुमार तिवारी, अजय कुमार श्रीवास्तव, राजेंद्र कुमार नागवंशी, वनरक्षक राजेश यादव, राजेश सरयाम व अजय कुमार गौर, वनरक्षक रामकुमार पटेल, संतोष योगी, राजकुमारी, नारायण सिंह वर्मा और राकेश वर्मा के नाम शामिल है।
क्या है मामला
सितंबर 2025 में इटारसी. परिक्षेत्र के जंगलों में ताखु सागौन की अवैध कटाई की शिकायतें सामने आईं। वन विभाग ने जब क्षेत्र का सर्वे कराया तो पाया गया कि 700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 1236 पेड़ पूरी तरह गायब हैं। माफिया ने यह कटाई 2023 से 2024 के बीच की थी, जबकि क्षेत्रीय वन अमला मौके पर तैनात था। वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि इस लापरवाही से सरकारी राजस्व को 2.04 करोड़ का नुकसान हुआ।

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