-३५००-३६०० रुपए क्विंटल बेच रहे सोयाबीन, नहीं मालूम कितना मिलेगा भावांतर
अनोखा तीर, हरदा। इस बार मध्यप्रदेश की सरकार द्वारा सोयाबीन की फसल को समर्थन मूल्य पर न खरीदते हुए भावांतर योजना के तहत खरीदने का निर्णय लिया है। भावांतर योजना शुरु होने के पश्चात किसानों में जो सोयाबीन अतिवृष्टि के कारण थोड़ी बहुत मात्रा में निकली थी, उसे मंडी में बेचना प्रारंभ कर दिया है। लेकिन सरकार द्वारा अभी तक मॉडल रेट तय नहीं किया है। जिसके कारण किसानों को यह पता नहीं है कि उनका माल पर कितना सरकार द्वारा भावांतर दिया जाएगा। वर्तमान में सोयाबीन मंडी में १८०० से लेकर ४४०० रुपए तक व्यापारियों द्वारा खरीदी जा रही है। देखने वाली बात यह है कि ९० से ९५ प्रतिशत माल ४००० रुपए प्रति क्विंटल से अंदर ही बिक रहा है। थोड़ा बहुत माल ही जो बीज के लिए होता है, उसे ही व्यापारी ४४०० रुपए तक खरीद रहे हैं, इसके बावजूद मंडी प्रशासन जो मॉडल भाव प्रतिदिन जारी कर रहा है, वह सही नहीं दिखाई दे रहे हैं। १ अक्टूबर की ही बात करें तो सोयाबीन १८०१ से लेकर ४४०० रुपए तक बिकी थी और इसका मॉडल भाव मंडी प्रशासन द्वारा ४२ रुपए बताया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि सिर्फ इक्का दुक्का किसानों की ही सोयाबीन ४००० से ऊपर बिकी थी। इसके बावजूद मॉडल रेट को बढ़ाकर बताया जा रहा है। देखने वाली बात यह है कि यदि ४२०० रुपए का मॉडल रेट भी प्रदेश सरकार तय करती है तो क्या किसानों को १ हजार रुपए से अधिक प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को भावांतर की राशि प्रदाय की जाएगी। जिले के किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि योजना के तहत खरीदी शुरू हुए दस दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक मॉडल रेट तय नहीं हो पाया है। कई किसानों ने बताया कि वे सोयाबीन बेचने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि भावांतर योजना के तहत उन्हें कितना भाव मिलेगा। शासन से अभी तक खरीदी की तय मात्रा की जानकारी भी नहीं मिली है।
किसानों ने जताई नाराजगी
ग्राम झुंडगांव के किसान सुरेश गौर ने कहा कि नगद बेचने पर दाम ज्यादा मिल रहे हैं, जबकि भावांतर योजना में भाव कम मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की यह योजना किसानों को धोखा देने वाली है। ग्राम कनारदा के किसान रमेश ने कहा कि योजना शुरू हुए दस दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक सही जानकारी नहीं दी गई है। कई फर्जी वीडियो फैलने से किसानों में और भ्रम की स्थिति है।
अधिकारियों ने दी सफाई
मंडी सचिव हरनारायण भिलाला ने बताया कि उपज में नमी अधिक होने के कारण भाव कम हैं। उन्होंने कहा कि शासन से अभी तक मॉडल रेट और खरीदी की मात्रा को लेकर कोई निर्देश नहीं मिले हैं। जिले के डीडीए जे.एल. कास्दे ने बताया कि अब तक 32301 किसानों ने योजना में पंजीकरण कराया है। इनमें से 3356 किसानों से 73,340 क्विंटल सोयाबीन खरीदी जा चुकी है।
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