अनोखा तीर, मसनगांव। केंद्र सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मजदूरों को काम देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन यह योजना अब धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। पंचायतों के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मनरेगा के अंतर्गत कोई भी काम नहीं हुआ है। शुरुआत में योजना के तहत मजदूरों को काम दिया जाता था, लेकिन अब यह योजना फिसड्डी साबित हो रही है। मनरेगा का क्रियान्वयन जिला पंचायत के अधीन होता है, जिसमें पंचायत स्तर पर मजदूरों की संख्या के हिसाब से काम निर्धारित किया जाता था। पहले इस योजना में ग्रेवल मार्ग निर्माण, नहर की सफाई, पौधा रोपण जैसे कई कार्य मजदूरों से कराए जाते थे। वर्तमान समय में मनरेगा योजना केवल प्रधानमंत्री आवास से जुड़ी राशि के लिए ही संचालित हो रही है, जिसे मकान बनाने वाले को ही दिया जाता है। पंचायत स्तर पर अन्य किसी भी काम का आयोजन नहीं हो रहा, जिससे मजदूर बारिश के दिनों में घर बैठकर समय व्यतीत करने को मजबूर हैं। पिछले तीन-चार सालों से योजना का सही क्रियान्वयन न होने के कारण पंचायतों में काम की कमी बनी हुई है। कई पंचायत जानबूझकर मनरेगा योजना में हाथ नहीं डाल रही हैं, जबकि शासन के नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत की योजनाओं में मजदूरों से काम कराना अनिवार्य है। मजदूरों का कहना है कि पहले मनरेगा योजना में खनन, सड़क निर्माण, पौधा रोपण और नहर की सफाई जैसे कई कार्य संचालित होते थे। लेकिन पिछले दो सालों से सरपंच और सचिव ने रुचि लेना बंद कर दिया है, जिससे योजना पूरी तरह ठप पड़ गई है। मसनगांव पंचायत में करीब 175 मजदूरों के जॉब कार्ड बने हुए हैं, लेकिन अब उन्हें केवल वृक्षारोपण, नाली निर्माण और भवन निर्माण के काम में लगाया जाता था, जो अब बंद हैं।
सीमित हुए काम
पहले मनरेगा योजना में नहर की सफाई का काम मिलने से अधिकांश मजदूर नहरों पर काम करने जाते थे, लेकिन दो साल से यह कार्य योजना से हटा दिया गया है। गांव की सफाई भी अब इस योजना में शामिल नहीं है। वर्तमान में केवल नाली निर्माण और सड़क निर्माण के लिए 15वीं वित्त आयोग की राशि आती है, जिसमें टाइट और अन-टाइट के हिसाब से खर्च करना पड़ता है, लेकिन दोनों ही योजनाओं में काम बंद हैं। मजदूरों के पास अब केवल किसानों के खेतों में काम करने का विकल्प बचा है।
मजदूरी कम, काम भी नहीं
मनरेगा योजना में मजदूरों को प्रतिदिन 243 रुपये मजदूरी मिलती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी लगभग 350 से 400 रुपये प्रतिदिन है। इसके बावजूद जिले की पंचायतों में काम की कमी बनी हुई है। पंचायत सचिव नंदलाल बघेल ने बताया कि पंचायत में ग्रेवल मार्ग का काम पिछले तीन साल से बंद है। मनरेगा के तहत वृक्षारोपण, नाली निर्माण और भवन निर्माण के सभी कार्य बंद पड़े हैं। नहरों में सफाई का अभाव मनरेगा में काम बंद होने के कारण नहरों की सफाई भी नहीं हो पा रही है। अब जल संसाधन विभाग द्वारा नहरों की सफाई कराई जाएगी।
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