-भावांतर मिले या हो समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी
नितेश गोयल, हरदा। केंद्र सरकार द्वारा फसलों का समर्थन मूल्य हर वर्ष बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी धरातल पर किसानों को इसका लाभ मिल नहीं पा रहा है। इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा खरीफ में बोई जाने वाली मक्का की फसल का समर्थन मूल्य २४०० रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया है, लेकिन सरकार द्वारा घोषित किए गए समर्थन मूल्य के आधे से भी कम दामों पर कृषि उपज मंडियों की व्यापारियों द्वारा मक्के की खरीदी की जा रही है। हम विगत १३ अक्टूबर से १५ अक्टूबर तक ३ दिन हुई हरदा मंडी में नीलामी की बात करें तो जहां १३ अक्टूबर को हरदा कृषि उपज मंडी में ६५३१ क्विंटल मक्के की आवक हुई थी, जो १०७७ रुपए से लेकर १८६१ रुपए बिकी, मंडी प्रबंधन द्वारा इस पूरी खरीदी में मक्के का औसत विक्रय मूल्य १२०० रुपए प्रति क्विंटल दिखाया गया। वहीं १४ अक्टूबर को हुए घोष विक्रय में मक्का १०८० से लेकर १८६० रुपए तक बिकी। इसका मॉडल मूल्य मात्र ११६१ रुपए प्रति क्विंटल था। इसी तरह आज १५ अक्टूबर को हुई नीलामी में मक्का का भाव १ हजार रुपए प्रति क्विंटल से १७६१ रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। इस संपूर्ण विक्रय का मॉडल भाव ११५० रुपए प्रति क्विंटल दर्ज हुआ। जहां इस वर्ष अतिवृष्टि के कारण किसानों की सोयाबीन एवं मक्का की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं अब किसानों को लाभकारी मूल्य न मिलने के कारण दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर सरकार के नुमाईंदे अपने भाषणों में भावांतर और समर्थन मूल्य पर बढ़ाई गई मूल्य वृद्धि को आमजनों को बताकर अपनी पीठ खुद ही थपथपा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर किसान आर्थिक संकट के कारण कर्जदार होता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि यदि वास्तविक में वह किसान हितैषी है तो समर्थन मूल्य पर मक्का एवं सोयाबीन की खरीदी करे या तो जिस तरह सोयाबीन की फसल को समर्थन मूल्य पर न खरीदते हुए सरकार भावांतर का लाभ दे रही है। उसी तरह मक्का लगाने वाले किसानो को भी भावांतर का लाभ देकर उन्हें समर्थन मूल्य के हिसाब से राशि प्रदाय की जाए।
Views Today: 2
Total Views: 306

