सतपुड़ा में टाइगर इस्टीमेट के विषय पर सीसीएफ को ट्रेनिंग देंगे फारेस्ट गार्ड

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गणेश पांडे, भोपाल। अखिल भारतीय टाइगर इस्टीमेट 2026 के लिए प्रदेश के सभी सीसीएफ की दो दिनी कार्यशाला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना में आयोजित की जा रही है। इस कार्यशाला में फारेस्ट गार्ड फारेस्ट अफसरों को ट्रेनिंग देंगे। हालांकि फारेस्ट द्वारा ट्रेनिंग दिए जाने पर कतिपय सीनियर अफसरों को एतराज है।  15 और 16 अक्टूबर को होने वाली कार्यशाला में फील्ड में टाइगर के आंकड़ों का एकत्रिकरण पर बड़वाह वन मंडल में पदस्थ फारेस्ट गार्ड राजेंद्रसिंह चौहान प्रशिक्षण के महत्व को समझाएंगे और बाघ गणना के अनुभव को बताएंगे। इसी प्रकार  मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना पद्धति राजेश पटेल, वनरक्षक, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, शाकाहारी वन्यप्राणियों के गणना पद्धति विषय पर इंदौर वनमंडल में पदस्थ फारेस्ट गार्ड प्रवीण मीना, वनस्पति एवं पेलेट के पहचान तथा आंकड़ों का एकत्रीकरण पर पेंच टाइगर रिज़र्व के फारेस्ट गार्ड संजय नामदेव सभी सीसीएफ को प्रशिक्षण देंगे। साथ ही बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के वनरक्षक कमलेश कुमार नंदा एम-स्ट्रीप्स एप के माध्यम से आंकड़ों की संग्रहण पद्धति को बताएंगे। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्ट के फारेस्ट गार्ड ताराचंद और कूनो नेशनल पार्क के वनरक्षक घनश्याम कैमरा ट्रैपिंग एवं फेज में उपयोग किये जाने वाले विभिन्न उपकरणों की जानकारी देंगे।
हममें सीखने की क्षमता होनी चाहिए
फॉरेस्ट गार्ड से प्रशिक्षण पर कतिपय सीसीएफ को एतराज है। उनकी प्रतिक्रिया थी कि विभाग में इतने बुरे दिन आ गए हमें फारेस्ट गार्ड से प्रशिक्षण लेना होगा। फारेस्ट गार्ड से प्रशिक्षण पर वन बल प्रमुख वीएन अंबाड़े भी सहमत नहीं है। एक इस सीनियर अधिकारी ने पूर्व पीसीसीएफ वन्य प्राणी रहे एचएस पाबला, जीतेन्द्र अग्रवाल और जेएस चौहान को प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ तौर पर बुलाना चाहिए था। यह बात अलग है कि पीसीसीएफ वन्य प्राणी शुभरंजन सेन कहते हैं कि
इसमें ग़लत क्या है? हमारे गार्ड्स प्रशिक्षित और सक्षम हैं। हमें किसी से भी सीखने की क्षमता होनी चाहिए। चार साल पहले भी ऐसा ही किया गया था। पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनी सिंह के साथ एक एसडीओ का मत है कि वर्ष 2022 में फील्ड  पर काम करने वाले इन वनरक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की फील्ड में मांसाहारी वन्यप्राणियों की गणना के दौरान उच्च गुणवत्ता के साथ की गई मेहनत के कारण ही मध्य प्रदेश टाइगर स्टेट, पैंथर स्टेट बन सका था। ये वनरक्षक और उनके जैसे कई अन्य वनरक्षक मास्टर ट्रेनर के रूप में एक्सीलेंट काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश वन विभाग ने वनरक्षको को इस हेतू ट्रेनिंग दी गई थी। इन वनरक्षकों पर मध्य प्रदेश वन विभाग  गर्व कर सकता है। एक रिटायर्ड डीएफओ ने राजेश पटेल वनरक्षक की तारीफ करते हुए कहा कि पटेल बहुत ही अनुभवी है। वह कई उच्च अधिकारियों से बहुत ही बेहतर प्रशिक्षक है।

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