टिमरनी में गूंजी भारतीय ज्ञान परंपरा की स्वर-लहरियां

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अनोखा तीर, टिमरनी। भाऊसाहेब भुस्कुटे शासकीय महाविद्यालय टिमरनी में 14 अक्टूबर को भारतीय ज्ञान परंपरा  विविध आयाम विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल के आदेशानुसार भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के द्वारा संपन्न किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय की छात्रा कुमारी संजना उईके ने मंगलमय सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्राचार्य एवं वेबीनार के संरक्षक डॉ. जे. के. जैन ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानवता के मूल्यों, संस्कृति और समरसता की जड़ में स्थित है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अरुण सिकरवार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए वेबीनार की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह वेबीनार भारतीय दर्शन, संस्कृति, समाज, शिक्षा और विज्ञान के समसामयिक संदर्भों को जोड़ने का एक प्रभावी प्रयास है। इस वेबीनार के मुख्य सलाहकार मंडल में डॉ. मथुरा प्रसाद, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, नर्मदापुरम, म.प्र. उच्च शिक्षा विभाग, डॉ. कामिनी जैन, प्राचार्य, शासकीय गृह विज्ञान महाविद्यालय, होशंगाबाद, डॉ. संगीता बिले, प्राचार्य, पी.जी. कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस हरदा, डॉ. धीरा शाह प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय सिराली, डॉ. आरके पाटिल, पूर्व प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय टिमरनी शामिल रहे। मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रशेखर गोस्वामी, सेवानिवृत्त प्राध्यापक (रसायन शास्त्र), लेखक एवं कथा प्रवक्ता, भोपाल ने अपने उद्बोधन में रामायण के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा भारतीय ज्ञान परंपरा का सार जीवन मूल्यों, कर्तव्य और सेवा भावना में निहित है। रामायण हमें यह सिखाती है कि संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने की जीवंत चेतना है। द्वितीय वक्ता मुकेश कुमार, सहायक प्राध्यापक शासकीय महाविद्यालय शाहजहांपुर केंट, उत्तर प्रदेश ने भारतीय शिक्षा दर्शन में गुरु-शिष्य परंपरा की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और मानवता की साधना है। तृतीय वक्ता श्रीमती हंसा संजय बागरे सहायक प्राध्यापक शिक्षा विभाग, एजुकेशन सोसाइटी कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, यवले जिला नासिक, महाराष्ट्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति का स्थान अत्यंत ऊंचा रहा है, और ज्ञान परंपरा ने सदैव स्त्री को सृजन, संवेदना एवं संस्कृति का केंद्र माना है। इस वेबीनार की संयोजक सुश्री मीनाक्षी यादव ने सभी अतिथियों का परिचय देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
वेबीनार में देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से 555 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया तथा 80 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 15 शोध पत्रों का वाचन किया गया। संपूर्ण जानकारी का संकलन एवं वेबीनार का संचालन डॉ. सुनीत काशिव आयोजन सचिव द्वारा किया गया। तकनीकी सहयोग समिति के सदस्य डॉ. पंकज खैरनार, डॉ. दीपक मालाकार एवं डॉ. अभिषेक अग्रवाल ने तकनीकी संचालन में सहयोग दिया। आयोजन समिति की ओर से डॉ.संजय पटवा, डॉ. संजीत सोनी एवं अभिषेक नागपुरे ने विशेष सहयोग प्रदान किया। इस वेबीनार को सफल बनाने में महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं संपूर्ण स्टाफ का पूर्ण सहयोग रहा। अंत में डॉ. ज्योति काशिव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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