अनोखा तीर, हरदा। विश्वरंग टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के अंतर्गत आजादी का अमृत महोत्सव को समर्पित विश्वरंग पुस्तक यात्रा एवं कौशल विकास यात्रा 2025 का आयोजन आईसेक्ट समूह और डॉ. सीवी रमन यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में महात्मा गांधी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, हरदा में किया गया। इस आयोजन के अंतर्गत 25 सितंबर से 6 अक्टूबर तक विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच निबंध लेखन, वाद-विवाद, भाषण एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य जे. पी. प्रजापति ने की। मुख्य अतिथि वनमाली सृजन केंद्र हरदा की अध्यक्ष शोभा वाजपेयी, विशेष अतिथि पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्रो. विकास, मुख्य वक्ता समाजसेवी एवं शिक्षाविद ज्ञानेश चौबे, कार्यक्रम समन्वयक उमेश शर्मा और आईसेक्ट के क्षेत्रीय प्रबंधक नितेश सिसोदिया रहे। कार्यक्रम का संचालन जीपी गौर ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. स्वाति गुरु ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता कृत्रिम नहीं, असली क्रांति नामक हिंदी पुस्तक का विमोचन अतिथियों के माध्यम से करवाया। इसके बाद अतिथियों ने विद्यार्थियों को पुस्तकों के प्रति प्रेम और कौशल विकास की दिशा में प्रेरित किया। शोभा वाजपेयी ने कहा कि किताबें हमारे जीवन की सच्ची साथी हैं। इनसे न केवल ज्ञान मिलता है बल्कि भावनात्मक संवेदनाएं भी जागृत होती हैं। मोबाइल से पढ़ने की अपेक्षा किताबें पढ़ने से मन अधिक शांत और एकाग्र रहता है। ज्ञानेश चौबे ने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से हमारे मन में अनेक संवेदनाएं उत्पन्न होती हैं, जो सोचने की शक्ति प्रदान करती हैं। किताबों में छपे अक्षर अमृत समान हैं जो कभी मिटते नहीं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 में पारंपरिक और पुस्तकीय शिक्षा को पुन: महत्व दिया गया है। आज की पीढ़ी पुस्तकों से दूर हो रही है, इसलिए ऐसी यात्राएं विद्यार्थियों को किताबों से जोड़ने का माध्यम हैं। प्रो. विकास ने कहा कि केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में सफलता के लिए कौशल आवश्यक है। अनेक युवा डिग्रियां लेकर भी बेरोजगार हैं क्योंकि उनके पास व्यावहारिक कौशल का अभाव है। प्राचार्य जे. पी. प्रजापति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो पुस्तकों के प्रति लगाव और समर्पण रखना होगा। पुस्तकों से अनुशासन, धैर्य और सीखने की प्रेरणा मिलती है। आईसेक्ट प्रवक्ता नितेश सिसोदिया ने कहा कि कौशल किस्मत की वह चाबी है जो भविष्य के बंद दरवाजे खोलती है। त्रिलोक शर्मा ने बताया कि पुस्तकें शिक्षा का मूल आधार हैं। रमन क्षेत्रीय संसाधन केंद्र के समन्वयक उमेश शर्मा ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक प्रगति के लिए पुस्तकों से जुड़ाव अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर शिक्षा में दक्ष होना चाहिए ताकि वे बदलते समय की मांगों के अनुरूप स्वयं को विकसित कर सकें। अंत में आभार व्यक्त करते हुए स्वाति गुरु ने कंप्यूटर शिक्षा के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम के पश्चात विद्यालय से पुस्तक एवं कौशल विकास यात्रा का शुभारंभ हुआ। इस यात्रा के दौरान नगर भ्रमण भी किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने किताब पढ़ो कौशल बढ़ाओ जैसे नारों के साथ लोगों को पुस्तकों और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया। विद्यार्थियों ने पूरे नगर में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए शिक्षा, साहित्य और आत्मविकास का संदेश दिया।

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