नागरिक कर्तव्यों के पालन से होगा राष्ट्र का कल्याण : प्रशांत मालवीय

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अनोखा तीर, खिरकिया। संघ शताब्दी वर्ष 1925-2025 के उपलक्ष्य में देशभर में उत्साहपूर्वक पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। इन आयोजनों में स्वयंसेवक बढ़-चढ़कर सहभागी हो रहे हैं और बड़ी संख्या में नए स्वयंसेवक भी जुड़ रहे हैं। इसी क्रम में खिरकिया खंड के चौकड़ी में भी भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें चौकड़ी, कुड़ावा, लोध्याखेड़ी, पाहनपाट और धनपाड़ा के सैकड़ों स्वयंसेवक शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता हरदा जिला प्रचारक प्रशांत मालवीय ने कहा कि हिंदू समाज की संगठित शक्ति से ही देश की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि बीते 100 वर्षों में संघ ने समाज की चेतना जागृत कर अनेक राष्ट्रीय कार्य किए हैं जैसे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, रामरक्षा सेतु आंदोलन, गोवा मुक्ति आंदोलन, भारत-पाक और चीन युद्ध के दौरान सहयोग, कोरोना काल एवं प्राकृतिक आपदाओं में सहायता आदि। श्री मालवीय ने कहा कि जो यात्रा भारत वह देश है जहां छोटे भाई ने बड़े भाई की खड़ाऊ की सेवा की, श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को कंधे पर तीर्थ यात्रा कराई। यह भोगभूमि नहीं, कर्मभूमि और पुण्यभूमि है। यहां सदैव अधिकारों से अधिक कर्तव्यों की बात होती रही है।
आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी अपने नागरिक कर्तव्यों को समझे बिजली बचाना, शासकीय संपत्ति की रक्षा, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना, संविधान के नियमों का पालन करना आदि अपने आचरण में लाए, तभी राष्ट्र का कल्याण संभव होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति का अर्थ है मनसा, वाचा, कर्मणा, अर्थात जो मन में हो, वही कर्म और व्यवहार में दिखे। देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें। डॉ. हेडगेवार कहा करते थे कि शक्ति केवल शस्त्रों में नहीं, बल्कि उस समाज में होती है जो नीतिवान, चरित्रवान और राष्ट्रप्रेमी हो। इसी शक्ति की उपेक्षा के कारण भारत का विभाजन हुआ, लेकिन यह विभाजन स्थायी नहीं है  एक दिन भारत पुन: अखंड होगा। भारत का मिशन सदैव विश्वशांति रहा है, इसलिए भारत का शक्तिशाली होना अनिवार्य है। प्रशांत ने आगे कहा कि शून्य का आविष्कार भारत में हुआ, परंतु स्व का बोध न होने से हमने स्वयं को शून्य मान लिया। जिस कालगणना को समझने में नासा करोड़ों खर्च करता है, उसे हमारे देश का साधारण ज्योतिषी पंचांग देखकर जान लेता है — यही हमारे ज्ञान और विज्ञान की परंपरा है। हिंदू धर्म में छुआछूत का कोई स्थान नहीं; हाल ही में संपन्न महाकुंभ इसका उदाहरण है, जहां किसी ने किसी की जाति नहीं पूछी। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगाना, जल बचाना, प्लास्टिक हटाना और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना भी राष्ट्रभक्ति का ही रूप है। नागरिक कर्तव्यों के पालन से ही राष्ट्र सशक्त बनेगा। पथ संचलन में लगभग 300 स्वयंसेवक सम्मिलित रहे।

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