अनोखा तीर, करताना। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में मंडल-मंडल और ग्राम-ग्राम में पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। इसी क्रम में टिमरनी खंड के तजपुरा मंडल के गोंदागांव गंगेश्वरी में विशाल पथ संचलन का आयोजन किया गया। इसमें गोंदागांव, कुहिग्वाड़ी, तजपुरा, छिपानेर, लछौरा, शमशाबाद, भंवरास, बिल्लोद और जलौदा ग्रामों के स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नर्मदापुरम विभाग के विभाग प्रचारक नरेंद्र यादव ने कहा कि कलयुग में संगठन शक्ति ही जागृति का आधार बनेगी। वेदों और पुराणों में कहा गया है कि जब सब एक सूत्र में बंधेंगे, तभी सभी सपने साकार होंगे। संघ की अब तक की यात्रा में शाखा तंत्र ने देश को चरित्रवान और नि:स्वार्थ भाव से कार्य करने वाले कार्यकर्ता दिए हैं। जब-जब देश को आवश्यकता पड़ी, स्वयंसेवकों ने त्परता से योगदान दिया, चाहे कोरोनाकाल रहा हो, श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन, अमरनाथ आंदोलन, दादरा एवं नगर हवेली या गोवा मुक्ति आंदोलन, विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा जैसे अवसर रहे हों, संघ के स्वयंसेवक सदैव अग्रणी रहे हैं। नरेंद्र यादव ने कहा कि जो देश को चाहता है, वह कुछ और नहीं चाहता। देश के लिए अनेक बलिदान होते हैं, क्योंकि अपने जीवन से बड़ा देश होता है। उन्होंने कहा कि भारत ग्रामों में बसता है, इसलिए आज आवश्यकता है कि हम सभी राष्ट्रहित में चिंतन करें। उन्होंने पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए बताया कि सामाजिक समरसता के तहत ‘एक मंदिर, एक श्मशान, एक जलाशयÓ के माध्यम से समाज की विषमता को दूर कर संगठित हिन्दू समाज का निर्माण करना है।
-कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवारों में संस्कार और भारतीय पद्धति आधारित व्यवस्था का निर्माण करना है।
-स्व का बोध अर्थात ‘इंडिया नहीं भारत कहिएÓ, अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करना है।
-पर्यावरण संरक्षण के तहत रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम घर-घर लगाना, पौधे लगाना और प्लास्टिक का उपयोग न करना है।
-नागरिक कर्तव्यों का बोध कराना : देश की संपत्ति की रक्षा करना, संविधान के नियमों का पालन करना और युवाओं में राष्ट्रभक्ति का भाव जाग्रत करना है। उन्होंने कहा कि यदि देश का प्रत्येक नागरिक इन पंच परिवर्तनों पर कार्य करे तो आने वाले दस वर्षों में भारत विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनेगा। पथ संचलन के दौरान ग्रामवासियों में अत्यंत उत्साह रहा। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। महापुरुषों की झांकियों से ग्राम सुसज्जित था, द्वार-द्वार पर रंगोली बनाई गई थी। आयोजन में लगभग 270 स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

