अनोखा तीर, हंडिया। हंडिया तहसील क्षेत्र से 23 किलोमीटर दूर, हरे-भरे जंगलों के बीच इंदिरा सागर डैम के बैक वाटर क्षेत्र में बसे कांकरदा ग्राम के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं। 15 जुलाई 2005 को प्रशासन और एनएचडीसी द्वारा विस्थापित कर पुनर्वासित इस ग्राम को कलेक्टर नगर का नाम दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि हरदा जिले के गठन के बाद तत्कालीन कलेक्टर बी.के. बाथम ने इंदिरा सागर बांध के बैक वाटर क्षेत्र में डूबने वाले गांवों का पुनर्वास कर शासन की तरफ से हरसंभव मदद मुहैया कराने के प्रयास किए। एनएचडीसी ने कांकरदा से सालियाखेडी तक 10 किलोमीटर सड़क मार्ग का निर्माण और विद्युत जैसी आवश्यक सुविधाओं के विस्तार के लिए कदम उठाए। लेकिन आज तक इन सुविधाओं का लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाया। ग्रामवासियों का कहना है कि विस्थापन और पुनर्वास के समय उन्हें यह उम्मीद थी कि उनके गांव में विकास की गंगा बहेगी, लेकिन 18 साल बाद भी यहां सड़क, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं अधूरी ही हैं। लोग आज भी कठिन और असुविधाजनक जीवन जी रहे हैं, और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर केवल औपचारिकताएं ही उपलब्ध हैं।

Views Today: 2
Total Views: 238

