नगर में कुत्तों का आतंक: प्रशासन नाकाम, जनता परेशान।

खरगोन ( मनीष मडाहर ) शहर में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई इन खूंखार होते जा रहे कुत्तों के झुंड से भयभीत है। आलम यह है कि शाम होते ही सड़कों पर निकलना दूभर हो जाता है और सुबह भी लोग घर से निकलने में कतराते हैं। खरगोन के संजय नगर इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आज सुबह 15 बच्चों को कुत्तों ने काट खाया है, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है। इन घटनाओं के बाद बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संजय नगर क्षेत्र में आवारा कुत्तों के झुंड लगातार बच्चों को निशाना बना रहे हैं। जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन घटनाओं से बच्चों में भय का माहौल है और वे घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। इस घटना से प्रशासन पर सवाल उठ रहे है ।
बढ़ती घटनाएं, बेबस नागरिक
पिछले कुछ समय से कुत्तों के काटने की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। स्थानीय अस्पतालों में प्रतिदिन ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं। बच्चों को खेलते समय, महिलाओं को बाजार जाते समय और राहगीरों को सामान्य आवाजाही के दौरान इन कुत्तों का निशाना बनाया जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये कुत्ते अब सिर्फ काट ही नहीं रहे, बल्कि राह चलते लोगों को दौड़ाकर डरा भी रहे हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे हुए है। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने या उन्हें पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नसबंदी कार्यक्रम भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जनता का कहना है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहा है और उनकी सुरक्षा के प्रति उदासीन रवैया अपनाए हुए है।
अंधेरे में डूबा भविष्य
इस समस्या के कारण लोगों में आक्रोश और डर का माहौल है। बच्चों को स्कूल भेजने वाले माता-पिता विशेष रूप से चिंतित हैं। उन्हें डर है कि कहीं उनका बच्चा इन आवारा कुत्तों का शिकार न हो जाए। यदि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं करता है, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
