उपद्रवी तत्वों के हवाले बस स्टैंड

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यात्री और दुकानदार त्रस्त, पुलिस मस्त

अनोखा तीर, हरदा। शहर का सुभाषचंद्र बोस बस स्टैंड इन दिनों उपद्रवी तत्वों के हवाले किया हुआ है। यहां आने वाले यात्री तथा दुकानदार सभी इन आवारा तत्वों से बेहद परेशान हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है कि पुलिस ने बस स्टैंड से अपना ध्यान पूरी तरह हटा दिया है। पूर्व में तात्कालीन पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप ङ्क्षसह ने बस स्टैंड पर पुलिस की २४ घंटे तैनाती के साथ ही एक पुलिस चौकी की भी स्थापना की थी। उन्होंने हरदा कोतवाली प्रभारी को ताकित किया था कि वह दिन में दो बार अनिवार्य रूप से स्वयं अथवा अपने सहायक निरीक्षक को पुलिस मोबाईल के साथ बस स्टैंड की स्थिति का जायजा लेने भेजे। पुलिस कप्तान की इस पहल से बस स्टैंड गुंडा तत्वों से मुक्त हो गया था। उसके बाद समय के साथ-साथ पुलिस का ध्यान न केवल बस स्टैंड से हटता गया, बल्कि तात्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रारंभ की गई पुलिस चौकी भी बंद कर दी गई। वर्तमान पुलिस कप्तान अभिनव चौकसे द्वारा लंबे समय पहले बनाई गई एक अस्थाई पुलिस चौकी रंग-रोगन तो करवाया गया, लेकिन वहां पुलिस की तैनाती करना शायद भूल गए। हालात यह है कि बस स्टैंड पर यात्रियों के साथ छीना-छपटी तथा सिकलीगर सरदारों द्वारा चादर बेचने के नाम पर यात्रियों से ठगी का काम बदस्तूर जारी है। चूंकि यात्रियों के पास अपने गंतव्य पर जाने की आपाधापी में इतना समय नहीं होता कि वह थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज करा सकें। वैसे भी बाहर से आने वाला यात्री यह जानता है कि पुलिस शिकायत करने पर उसे गवाह उपलब्ध नहीं होंगे। वहीं नक्शा मौका, बयान दर्ज जैसी अन्य प्रक्रियाओं के चलते उसे आगे का सफर स्थगित करना पड़ेगा या पुन: आना पड़ेगा। इसी बात का फायदा अपराधिक तत्वों द्वारा उठाया जाता है। बस स्टैंड के पास ही नगर पालिका के सबमर्सिवल पंप के इर्द-गिर्द नशाखोरों ने भी अपना अड्डा बना रखा है। यहां गांजा और शराब इत्यादी का सेवन करने वाले तत्वों का जमघट लगा रहता है और यही नशाखोर नशे में धुत होकर बस स्टैंड के दुकानदारों तथा यात्रियों से आए दिन अभद्रता करते हैं। अगर पुलिस कप्तान बस स्टैंड का आकस्मिक निरीक्षण करें तो उन्हें वस्तुस्थिति पता चल सकती है। वह स्थानीय दुकानदारों से भी वहां की स्थिति के बारे में वास्तविकता का पता लगा सकते हैं। चूंकि अभी पुलिस का वास्ता बस स्टैंड और यहां आने वाली बसों से महज दैनिक और मासिक एंट्री प्राप्त करने तक ही है। किसी को इस बात से कोई गुरैज नहीं है कि पुलिस यहां से संचालित होने वाली बसों से क्या लेती है और क्या नहीं? अपेक्षा है तो महज इतनी कि यहां की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद हो जाए। जिससे यात्री और दुकानदार दोनों को इन उपद्रवियों से राहत मिल जाए। उम्मींद है पुलिस कप्तान इस ओर अवश्य ध्यान देंगे।

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