नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए नहीं है ठहरने की सुविधा

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मंदिर में होता है रात्रि विश्राम

अनोखा तीर, मसनगांव। क्षेत्र में नर्मदा परिक्रमावासियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए रात्रि विश्राम की सुविधा न होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशान होना पड़ता है। प्रतिवर्ष परिक्रमावासियों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखने को मिल रही है। पिछले कुछ वर्षो से मां नर्मदा की पैदल परिक्रमा करने के लिए सैकड़ो श्रद्धालू रोजाना गांव से निकलते हैं, जिनमें से कई रात्रि विश्राम के लिए गांव में ठहरते हैं, पर ग्राम में उचित व्यवस्था न होने से श्रद्धलुओं को मंदिर के बाजू में बने बरामदे में ठहरना पड़ता है। पिछले कई वर्षों से ग्रामीणों द्वारा ग्राम में सामुदायिक भवन बनाने की मांग की जा रही है, जिसमें साधु संत और नर्मदा परिक्रमावासियों के ठहरने की उचित व्यवस्था हो सके। पूर्व में इसके लिए विधायक कमल पटेल के द्वारा मंदिर प्रांगण में सामुदायिक भवन बनाने के लिए प्रयास किया गया था, परंतु प्रक्रिया आगे न बढ़ने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका जिससे गांव में श्रद्धलुओं को सुविधा नही मिल सकी। वहीं सावन के महीने में भी दादाजी दरबार खंडवा जाने वाले तथा राजस्थान के रामदेवरा जाने वाले श्रद्धालु भी गांव में ठहरते हैं, समुचित व्यवस्था न होने के कारण सभी को परेशानी होती है, जिसे देखते हुए ग्रामीणो द्वारा शासन से गांव में भवन का निर्माण करने की मांग की जा रही है, जिससे सभी को इसका लाभ मिल सके। वैसे पलासनेर में सोयाबीन प्लांट के बाजू में बिश्नोई समाज के द्वारा श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कमरों का निर्माण किया गया है, पर अधिक संख्या में श्रद्धालु ग्राम में ठहरते हैं, जहां पैदल परिक्रमावासियों के साथ बस तथा चार पहिया वाहन से परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में गांव में आते हैं, जिन्हें ठहरने की सुविधा नहीं मिल पाती। इस वजह से कई लोग मंदिर प्रांगण में रुकते हैं। वैसे भी ग्राम में सामुदायिक भवन न होने के कारण मांगलिक कार्यक्रमों के लिए खेत खलिहानों में व्यवस्था बनानी पड़ती है।

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