हरदा की महिला बांस कारीगरों की कारीगरी ने जीता दिल, बांस क्राफ्ट सामग्री की बढ़ी मांग

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अनोखा तीर, हरदा। हरदा की महिला कारीगरों द्वारा निर्मित बांस क्राफ्ट सामग्री ने न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई है। इन कारीगरों की कला ने लोगों का दिल जीत लिया है और बांस से बनी हस्तशिल्प वस्तुएं अब अधिक से अधिक मांग में हैं।

हरदा जिले की महिला कारीगरों द्वारा तैयार की गई बांस क्राफ्ट सामग्री जैसे कि बांस की घड़ियां, ज्वेलरी, सजावट के सामान, और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद, खास तौर पर इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन कारीगरों की मेहनत और हुनर को देखकर न सिर्फ स्थानीय समुदाय, बल्कि विभिन्न उद्योगों और बाजारों से भी सराहना मिल रही है। इन महिलाओं द्वारा निर्मित कारीगरी की गुणवत्ता और सुंदरता की अत्यधिक सराहना की जा रही है। स्थानीय बाजारों से लेकर बड़े मेले और प्रदर्शनियों तक, हर जगह इन बांस उत्पादों की भारी मांग देखी जा रही है। मुख्यमंत्री महोदय ने भी इस कला की सराहना करते हुए, स्थानीय कारीगरों के योगदान को प्रोत्साहित किया है। यह कारीगरी हरदा की महिला कारीगरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र की कला और संस्कृति को एक नई पहचान मिल रही है, जिससे बांस उद्योग को भी नई दिशा मिल रही है।

इस सफलता में एमएसएमई मंत्रालय, राष्ट्रीय हस्तशिल्प और हस्तकरघा विकास परिषद और सिनर्जी संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सिनर्जी संस्था के सदस्य शिखा जनोरिया, अशोक सेजकर, पंकज बैरागी और संजय कनक ने इस प्रक्रिया में कारीगरों को मार्गदर्शन और समर्थन दिया, जिससे इस कला के विस्तार में मदद मिली और स्थानीय कारीगरों को एक नई दिशा मिली। इसके अलावा, एहसास एनजीओ 2025 मुंबई में आयोजित मेले में भी इन महिला कारीगरों की कारीगरी को खूब सराहा गया। इस मेला का आयोजन डीओसीसी के सहयोग से किया गया था, जहां हरदा के बांस उत्पादों ने एक बार फिर अपनी विशिष्टता और गुणवत्ता का प्रदर्शन किया, जिससे इन कारीगरों की कला को और भी अधिक मान्यता मिली।

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