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Saturday, 17 October 2026
हरदा

सोयाबीन खरीदी..

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–पोर्टल पर नहीं हो रहे स्लॉट बुक, सैकड़ों किसान अब भी वंचित

-खरीदी केन्द्रों पर दिखा रहे क्षमता फुल

अनोखा तीर, हरदा। समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीदी में अब एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा जिले में २२ केन्द्र बनाए गए है जहां सोयाबीन की खरीदी की जा रही थी। अब सभी केन्द्रों पर स्लॉट बुक होना बंद हो गए है, जबकि अभी सैकड़ों किसान स्लॉट बुकिंग से वंचित है। अब जो भी किसान स्लॉट बुक करने पोर्टल पर जाता है तो उसे खरीदी केन्द्रों के सामने क्षमता फूल दिखाई दे रही है और रिक्त क्षमता शुन्य दिखाते हुए स्लॉट बुक नहीं हो पा रहा है। वही प्रशासन के इस एमपी उपार्जन पोर्टल में २० दिसबंर तक ही खरीदी होना बता रहे है। २० दिसबंर के बाद से खरीदी बंद होना दिखाई दे रही है। एक ओर पहले ही हजारों किसान पंजीयन ना कराने से अपनी उपज को मंडियों में एक-एक हजार रुपए क्विटंल कम दामों पर बेच रहे है। अब यदि पोर्टल पुन: शुरू नहीं किया गया तो पंजीयन कराने वाले सैकड़ों किसान भी समर्थन मूल्य पर उपज बिक्री से वंचित हो जाएंगे। इस संबंध में जब हमने कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों से चर्चा की तो उनका भी संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं था। हालांकि शासन स्तर पर ३० दिसबंर तक सोयाबीन खरीदी का कार्य किया जाना है, लेकिन एमपी उपार्जन के पोर्टल पर २० दिसंबर के बाद खरीदी बंद होना बताई जा रही है और २० दिसबंर तक सभी खरीदी केन्द्रों पर खरीदी क्षमता फूल बताई जा रही है। ऐसे में किसान अपना स्लॉट बुक ही नहीं कर पा रहे है।

नमी में नहीं आ रही कमी

सोयाबीन कटाई के लम्बे समय बीत जाने के बाद भी जब किसान अपनी उपज खरीदी केन्द्रों पर लेकर पहुंच रहा है तो उसकी उपज में अब भी १३ से १४ प्रतिशत नमी बताई जा रही है। किसानों का यहां तक कहना है कि अलग-अलग मशीन पर नमी भी अलग-अलग बाताई जा रही है। वही नमी के चलते कई ट्रालियों को वापस भेजा जा रहा है, तो वेअर हाउस में पहले से खरीदी गई सोयाबीन की नमी चेक करने पर १४ प्रतिशत नमी देखी जा रही है। इससे यह प्रतित हो रहा है कि नमी के मामले में नियम सटीक नहीं बैठ पा रहे है। जिसके चलते किसानों द्वारा सुपरवाईजर द्वारा सोयाबीन खरीदी में भेदभाव करने की बात कही जा रही है। साथ ही वेयर हाउस संचालक और समिति सर्वेयरों द्वारा मशीन में नमी बताकर नमी प्रतिशत के हिसाब से सोयाबीन खरीदी जा रही है। यदि १३ प्रतिशत नमी है तो प्रति क्विंटल1 किलो अधिक सोयाबीन देना होगी। इसी तरह प्रति प्रतिशत के हिसाब से किसानों से सोयाबीन अधिक ली जा रही है, हालाकि मंडी में सोयाबीन के रेट अत्यधिक कम होने के कारण मजबूरी में किसानों को इन लोगों की अवैध मांगों को मानना पड़ रहा है।

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