श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता देखकर श्रोता हुए भाव विभोर-भागवत कथा का हुआ समापन

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अनोखा तीर, हरदा। एक गरीब ब्राह्मण राजमहल के द्वार पर आया तो द्वारपालों ने उसे रोक लिया, इधर व्यासपीठ से सुदामा के भाव को व्यक्त करता हुआ गीत गाया गया, अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, के दर पे सुदामा गरीब आ गया है। द्वारपाल कन्हैया के पास सूचना लेकर गए और उन्हें बताया कि कोई सुदामा नाम का गरीब ब्राह्मण आया है। सूचना मिलते ही, कृष्ण नंगे पांव दौड़ पड़े। कृष्ण अपने मित्र सुदामा की दीन दशा देखकर रो पड़े, उन्होंने सुदामा का सत्कार किया। यह कथा नार्मदीय धर्मशाला में गुरुवार को भागवत कथा के समापन पर आचार्य नारायण साकल्ले ने कही। श्रीकृष्ण बने अनुज शुक्ला एवं सुदामा बने चकोर पारे के अभिनय को देखकर श्रद्धालु रो पड़े। कथावाचक ने कहा कि सच्ची मित्रता अमीरी गरीबी नहीं देखती है। दुख के समय सच्चा मित्र सदैव साथ रहता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा कभी पूर्ण नहीं हो पाती है, लेकिन कभी अधूरी भी नहीं रहती है। कथा के दौरान श्रीकृष्ण गोलोकगमन सहित अन्य कथाओं को विस्तार से कही। वहीं कृष्ण भजनों पर श्रोताओं ने नृत्य किया। कथा के समापन पर सर्व ब्राह्मण समाज संगठन के पदाधिकारियों सहित परिजनों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। सभी के सहयोग के लिए आयोजक अनिल शुक्ला एवं दीपक शुक्ला ने सभी का आभार माना। इसके बाद महाआरती हुई। अंत में सभी ने प्रसादी ग्रहण की। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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