– कांग्रेस में मंथन का दौर, जीताऊ उम्मीदवार की तलाशफोटो नाम से है
– कार्तिकेय चौहान एवं रामनिवास रावत
अनोखा तीर, हरदा। मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर आज चुनाव आयोग ने तिथियों की घोषणा कर दी है। जिसके चलते आगामी १३ नवंबर को मतदान होगा और २३ नवंबर को चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी। प्रदेश में बुधनी एवं विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होना है। बुधनी क्षेत्र से मध्यप्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान द्वारा लोकसभा चुनाव लड़कर केन्द्र में चले जाने के कारण यह सीट खाली हुई है। वहीं विजयपुर विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के विधायक रहे रामनिवास रावत ने भाजपा का दामन थाम लिया है। जिसके चलते इस सीट पर भी उपचुनाव होना है। कांग्रेस द्वारा दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में पिछले १४ अक्टूबर से कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर बैठकें आयोजित करते हुए स्थानीय स्तर पर जीताऊ चेहरे की तलाश की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में कहा है कि वह दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं की पसंद को महत्व देंगे। इसी तरह बीते दिवस बुधनी विधानसभा क्षेत्र के प्रवास पर आए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव ने भी कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट रुप से कहा है कि स्थानीय उम्मीदवार को ही महत्व दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस द्वारा बुधनी विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष अक्सर प्रयोगवादी नीति अपनाते हुए बाहरी उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा जाता रहा है। लेकिन इस बार कांग्रेस भी पुरानी गलतियों को सुधारते हुए स्थानीयता को महत्व देने का मन बना चुकी है। बहरहाल बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के लिए जीताऊ उम्मीदवार की तलाश करना भूसे के ढेर से सुई की तलाश जैसा है। वहीं दूसरी ओर विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से छह बार कांग्रेस के विधायक रहे रामनिवास रावत की जनता के बीच गहरी पैठ है। ऐसी स्थिति में वहां से उन्हें चुनौती देने वाले उम्मीदवार को निकालना भी टेड़ी खीर ही है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले रामनिवास रावत की दावेदारी लगभग तय है। भाजपा ने संभावित दावेदार के तौर पर उन्हें चुनाव तिथियों की घोषणा से पूर्व ही सार्वजनिक मंचों से संबोधित करना शुरु कर दिया है। इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान सरकार में उन्हें वन मंत्री का दायित्व भी सौंपा गया है। जहां तक बुधनी विधानसभा क्षेत्र का सवाल है तो यहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पसंद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। श्री चौहान की इस परंपरागत सीट से प्रबल दावेदारी उनके पुत्र कार्तिकेय चौहान की बनी हुई है। चूंकि मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान अपने विधानसभा क्षेत्र में उतना समय नहीं दे पाते थे ऐसी स्थिति में कार्तिकेय चौहान ही पूरे विधानसभा क्षेत्र में जनता के बीच लम्बे समय से अपनी सक्रियता बनाए हुए है। पिछले दो विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान अपने क्षेत्र के बजाए प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो और जनसभाएं करने में जुटे रहे। वहीं उनके क्षेत्र को सीधे तौर पर कार्तिकेय चौहान ने ही संभाल रखा था। वैसे तो इस विधानसभा क्षेत्र से शिवराज सिंह चौहान के पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर चुनाव लड़ने हेतु अपनी विधायिकी छोड़ने वाले पूर्व विधायक ठाकुर राजेन्द्र सिंह चौहान की दावेदारी भी मानी जा रही है। वहीं विदिशा लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे रमाकांत भार्गव, शिवराज सरकार के कार्यकाल में वन विकास निगम अध्यक्ष रहे गुरूप्रसाद शर्मा तथा भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मालवीय की दावेदारी भी चर्चा में बनी हुई है। लेकिन रमाकांत भार्गव और गुरूप्रसाद शर्मा तथा ठाकुर राजेन्द्र सिंह चौहान के ही सामने उम्र का तकाजा है। वहीं दूसरी ओर उपरोक्त चारों दावेदार की राजनीतिक पहुंच पकड़ भी शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से ही मानी जाती है। ऐसी स्थिति में इस विधानसभा क्षेत्र से ऐसा कोई दावेदार नहीं हो सकता जो शिवराज सिंह चौहान को नजरअंदाज कर अपनी दावेदारी का दम भर सके। इसी के साथ विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं ने भी अपनी मैदानी रिपोर्ट के साथ कार्तिकेय चौहान को प्रत्याशी बनाने का समर्थन पत्र प्रदेश अध्यक्ष को सौंप चुके है। मैदानी स्थिति, क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की मांग और मनोस्थिति तथा वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में शिवराज सिंह चौहान के कद को देखते हुए यह लगभग तय है कि इस विधानसभा क्षेत्र से कार्तिकेय चौहान ही भाजपा उम्मीदवार के रुप में मैदान में उतरेंगे। वैसे तो पिछली १४ अक्टूबर को प्रदेश चुनाव समिति की बैठक दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा ने चार उम्मीदवारों का पैनल बनाकर केन्द्रीय चुनाव समिति को भेज दिया है। इन चार उम्मीदवारों में कार्तिकेय चौहान, पूर्व सांसद रमाकांत भार्गव, गुरूप्रसाद शर्मा और पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह चौहान का नाम होना बताया जा रहा है। लेकिन यह भी तय है कि यह पैनल भेजना, कार्यकर्ताओं से रायशुमारी करना, चुनाव समिति द्वारा मैदानी रिपोर्ट लेना, क्षेत्र से सर्वे कराकर नामों पर रिपोर्ट तैयार करना यह सब राजनीति में कहने की बातें होती है। हकीकत तो इस सबसे परे होकर वही होता है जो संघ और संगठन में पैठ रखते हुए वरिष्ठ नेताओं की प्राथमिकी में शामिल होता है। वर्तमान में कार्तिकेय चौहान इसी तरह का एक नाम और चेहरा है जो तमाम प्रक्रियाओं के पश्चात बतौर भाजपा उम्मीदवार बुधनी विधानसभा क्षेत्र से जनता के बीच जनआशीर्वाद के लिए पहुंचते दिखाई दे रहे है।
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