नवरात्रि विशेष-स्वप्न में दिए देवी ने दर्शन-खेत के कुंए से निकाली गई महिषासुर मर्दनी की प्रतिमा

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खेत वाली माता के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

अनोखा तीर, हरदा। खेत के एक कुंए से निकली महिषासुर मर्दनी स्वरूप में माता की प्रतिमा का इतिहास अपने आप में अनूठा है। शहर के सिद्ध माता मंदिरों में एक महाराणा प्रताप कॉलोनी खेत वाली माता का मंदिर है। मां की प्रतिमा करीब ६० साल पहले मौर्य परिवार के खेत में बने कुएं से निकाली गई थी। यही पर रहने वाले एक पंजाबी परिवार के सदस्य को सपने में देवी ने दर्शन दिए जिसके बाद यह बात उसने भक्त सुशीला रानी मौर्य को बताई। सुशीला रानी मौर्य के कहने पर खेत के कुएं से मूर्ति निकाली गई और पिपल के पेड़ के निचे ओटला बनाकर विराजित की गई। आज यहां भव्य मंदिर है। मंदिर में मां की प्रतिमा का प्रतिदिन अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया जाता है। नवरात्रि के दौरान तो श्रृंगार देखते ही बनता है। मंदिर के पुजारी पं. कैलाश पुरोहित और भक्त दीपक शुक्ला ने बताया कि वर्तमान समय मैं जहां मंदिर बना हुआ है। वहां पहले खेत हुआ करता था। श्रद्धालु सुशीला रानी मौर्य को 1967 मैं माता रानी ने दर्शन दिए। इसके बाद खेत में बने कुएं में माता की मूर्ति निकली। जिसे वहीं के खेत में ओटला बनाकर में से में देवी विराजित किया गया। समय के साथ यहां बसावट हो गई। चूंकि खेत में माता की मूर्ति निकली और उन्हें वहीं विराजित किया गया इसलिए माता को खेत वाली माता कहा गया है। यह मंदिर जिलेभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।सन २००० में कुंए से निकली शीलाता माता प्रतिमा और शिवलिंग

। शीतला माता मूर्तिभक्तों ने बताया कि खेतवाली माता की प्रतिमा जिस कुए से निकली थी उसी कुए से सन २००० में शीतला माता की प्रतिमा और शिवलिंग भी निकली। शीतला माता की प्रतिमा पुराने मंदिर में और शिव लिंग की स्थापना नए मंदिर में की गई थी। शीतला माता की मुर्ति तो अभी भी विराजमान है, लेकिन २०२२ में शिवलिंग ने स्वयं ही अपने आप को दो हिस्सों में विभाजित कर लिया था। जिसके बाद भक्तों द्वारा शिवलिंग का विर्सजन कर दिया गया।१३ वर्षों से लगातार हो रहा पाठ२५ सालों से मंदिर में पूजन कर रहे कैलाश पुराहित ने बताया की मंदिर में श्रद्धालुओं ने सवा लाख सप्तशती पाठ करने का संकल्प लिया। इसके बाद 2009 में दुर्गा सप्तशती पाठ की शुरूआत हुई। करीब 15 साल से दुर्गा सप्तशती पाठ चार से पांच पुजारियों द्वारा किया जाता है। अब तक करीब 80 हजार पाठ हो चुके है। प्रतिदिन 8 से 10 पाठ होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में विशेष आराधना होती है। गरबा किया जाता है। पंचमी को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है। वहीं अंतिम दिन कन्या भोज होता है।

2007 में बना भव्य मंदिर

पहले खेत वाली माता का छोटा मंदिर था, लेकिन पीपल के पेड़ के कारण मंदिर की दीवार के गिरने की आशंका थी। ऐसे में पेड़ काटा जाए या नया मंदिर बनाया जाए। इसके बाद 2007 में श्रद्धालुओं ने नए मंदिर में खेत वाली माता की प्रतिमा स्थापित की गई। । वहीं पुराने मंदिर में भी देवी की प्रतिमा रखी है। पुराना मंदिर आज भी बना हुआ है। जिसे तोड़ा नहीं गया है। नवरात्रि में सैकड़ों श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए आते है।विद्यार्थी रोल नम्बर लिखकर अच्छे परिणाम की करते हैं मनोकामनामाता भक्त दीपक शुक्ला ने बताया कि खेत वाली माता अपने भक्तों की हर मनोकाना पूर्ण करती है। परीक्षा के समय कई विद्यार्थी माता मंदिर पर अपने रोल नम्बर लिखते है और पर्ची बनाकर दान पेटी में भी डाल कर माता से अच्छे परीक्षा के अच्छे परिणाम की मनोकामना करते है। शहर सहित दूर-दराज से भी सैकड़ों भक्त माता का आशिर्वाद लेने पहुंचते है।

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