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Wednesday, 14 October 2026
हरदा

किसानों के आंदोलन को सभी वर्ग दें समर्थन: जीवन पटेल

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अनोखा तीर, हरदा।
मानसून पर आधारित कभी पीला सोना कहे जाने वाली सोयाबीन की खेती आज किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है। न तो विगत कई वर्षों से मानसून की अनियमितता के कारण पर्याप्त उत्पादन हो रहा है और न ही विगत १० वर्षों से किसानों को इसकी लागत मूल्य मिल पा रहा है। सोयाबीन के भाव को लेकर जो किसानों ने एक आंदोलन की रूपरेखा बनाई है, उसे जिले के व्यापारियों को भी हर संभव मदद कर सफल बनाना चाहिए, यह बात अहिलवाड़ा के किसान महेंद्र सिंह गोदारा (जीवन पटेल) ने कही। उन्होंने कहा कि बीते १०-१२ वर्षों से सोयाबीन के भाव  नहीं बढ़ रहे हैं, जबकि सोयाबीन की खेती में लागत अत्यधिक होने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सोयाबीन के भाव वर्तमान में ३ हजार से लेकर ४ हजार क्विंटल तक चल रहे हैं, जबकि लागत को देखते हुए ६ हजार रुपए प्रति क्विंटल से अधिक भाव होना चाहिए। श्री पटेल ने कहा कि मैं एक किसान के रूप में बात कर रहा हूं। मेरा विरोध सरकार से नहीं, बल्कि उनकी नीतियों से है। जिले में आज किसान जो अपने हक की मांग कर रहे हैं, वह सभी दलों से संंबंधित है, चूंकि हरदा जिला एक कृषि प्रधान जिला है, यदि किसानो को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य मिलेगा तो व्यापारियों का व्यवसाय भी बढ़ेगा, इसलिए व्यापारियों को किसानो का समर्थन करते हुए १३ सितंबर को होने वाले आंदोलन को पूर्ण रूप से सफल बनाना चाहिए। श्री पटेल ने कहा कि हमने यह देखा है कि जिस अनाज की उपयोगिता कंपनी और बड़े-बड़े प्लांटो को होती है, उनकी कीमते वर्षों से किसानों को रुला रही हैं, जैसे गन्ने का उपयोग शुगर मिल वाले करते हैं, तो आज भी कौड़ियों के भाव गन्ने का समर्थन मूल्य रखा गया है, जबकि जलाउ लकड़ी उससे महंगी बिक रही है। यही हाल सोयाबीन का है। सोयाबीन को सिर्फ प्लांट वाले ही खरीदते हैं। यह लोग सरकार से नीतियों में बदलाव कर किसानो को लाभकारी मूल्य प्रदाय होने ही नही देते हैं। जबकि दूसरे खाद्यान्न में ऐसा नहीं होता है। श्री पटेल ने जिले के समस्त किसानों के हितों की चिंता करने वाले जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि सभी किसानों को उनका हक दिलाने में मदद करें।

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