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Thursday, 15 October 2026
हरदा

पंचतत्व में विलीन हुए मकड़ाई के राजा अजय शाह

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अनोखा तीर, सिराली। पूर्व रियासत मकड़ाई के राजा अजय शाह का लंबी बीमारी के चलते इंदौर में निधन हो गया, जिनका अंतिम संस्कार मकड़ाई राज परिवार मुक्तिधाम में किया गया। जानकारी के अनुसार 30 अगस्त शाम को राजा अजय शाह का स्वर्गवास हो गया था, जिनकी अंतिम यात्रा शनिवार को पैतृक गांव खुदिया से राज परिवार मुक्तिधाम  मकड़ाई तक निकाली गई। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों के साथ बैतूल-हरदा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डीडी उइके, मंत्री विजय शाह, पूर्व मंत्री कमल पटेल, हरदा विधायक डॉ.आरके दोगने, पूर्व विधायक संजय शाह, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश वर्मा, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष अमर सिंह मीणा, वरिष्ठ नेता पदम पटेल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओम पटेल, पूर्व विधायक निमाड खेड़ी राजनारायण सिंह पुरनी एवं हरदा खंडवा के साथ आसपास के गांव के ग्रामीणों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री शाह को मुखाग्नि उनके बड़े बेटे टिमरनी विधायक अभिजीत शाह के द्वारा दी गई।
शव यात्रा में उमड़ा जन सैलाब
शुक्रवार शाम राजा अजय शाह के निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। व्यापारी संघ के आह्वान पर स्थानीय व्यापारियों ने स्वैच्छिक रूप से अपने-अपने प्रतिष्ठान दोपहर 12 बजे तक बंद रखकर राजा अजय शाह के अंतिम दर्शन को पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही नगर के निजी स्कूलों में भी शोक स्वरूप स्कूलों में अवकाश रखा गया। इधर आसपास के गांव मकड़ाई रियासत से जुड़े हुए और राजघराने के संपर्क में होने के कारण अपने क्षेत्र के राजा अजय शाह को अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ो की संख्या में शव यात्रा में सम्मिलित हुए और श्रद्धांजलि अर्पित की। छोटे से ग्राम खुदिया में जब सैकड़ो की संख्या में लोग एकत्रित हुए तो ऐसा लग रहा था जैसे जन समूह उमड़ पड़ा हो।


सिराली परिषद का शव वाहन बना शोपीस
नगर परिषद सिराली के द्वारा हाल ही में नया शव वाहन क्रय किया गया है, जो अनुपयोगी साबित हो रहा है। सूत्रों के अनुसार नगर परिषद द्वारा क्रय किया हुआ वाहन छोटा है। ग्रामीण इस वाहन का उपयोग नहीं करते, क्योंकि छोटा होने से शव बराबर नहीं आता एवं परिवार के लोग भी इसमें नहीं बैठ पाते तथा गड्ढे वाले मार्ग अथवा ब्रेकर पर टकराने का खतरा रहता है। इसी के चलते राजा अजय शाह की अंतिम यात्रा के लिए खिरकिया नगर परिषद का शव वाहन बुलाना पड़ा। इसके बाद अंतिम यात्रा शुरू की गई। अंतिम यात्रा राम धुन के साथ शुरू हुई, जो की मकड़ाई मुक्तिधाम तक पहुंची। जहां पर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।
रातों-रात बनाया मार्ग
अंतिम संस्कार स्थल तक बारिश अधिक होने एवं खेत का रास्ता होने के कारण वहां तक पहुंचना असंभव था। इसी को ध्यान में रखते हुए शनिवार की रात को रात भर प्रशासन ने मुस्तैदी के साथ मार्ग बनवाया। इस मार्ग से होकर शव यात्रा मुक्तिधाम तक पहुंची और अंतिम संस्कार किया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

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