दो माह से नहीं मिला आंगनबाड़ी बच्चों का राशन, रसोइयों का मानदेय भी अटका

अनोखा तीर, मसनगांव। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पोषण योजनाओं के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में पिछले दो माह से राशन आपूर्ति नहीं होने के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को मिलने वाले पोषण आहार पर संकट गहराता जा रहा है। राशन की कमी के चलते स्व सहायता समूह की महिलाओं को अपने स्तर पर व्यवस्था कर आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन करना पड़ रहा है। वहीं केंद्रों में भोजन बनाने वाली रसोइयों को भी पिछले दो माह से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं। जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में छोटे बच्चों के साथ गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को नियमित रूप से पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक मंगलवार को विशेष पोषण आहार दिवस के तहत खीर, पूरी सहित अन्य पौष्टिक खाद्य सामग्री वितरित की जाती है। लेकिन अप्रैल और मई माह का राशन नहीं मिलने से केंद्रों का संचालन प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने घरों से खाद्यान्न और सामग्री लाकर बच्चों तथा महिलाओं के लिए भोजन तैयार कर रही हैं। स्व सहायता समूह की जिला अध्यक्ष सुनीता डोले और सचिव ममता वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में राशन और मानदेय की समस्या लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाओं द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समय पर राशन और भुगतान उपलब्ध कराने की मांग की गई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। हाल ही में जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन देकर लंबित राशन और मानदेय जारी करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। समूह संचालकों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। राशन नहीं मिलने से बच्चों के पोषण कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं और समूह की महिलाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
रसोइयों के सामने आर्थिक संकट
आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन बनाने वाली रसोइयों को भी पिछले दो माह से मानदेय नहीं मिला है। समूह की महिलाओं ने बताया कि रसोइयों को प्रतिमाह लगभग 500 रुपये मानदेय दिया जाता है, जबकि मध्यान्ह भोजन बनाने वाली महिलाओं को 4 हजार रुपये तक का भुगतान मिलता है। दो माह से भुगतान अटका होने के कारण रसोइयों को घर का खर्च चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पोषण व्यवस्था पर पड़ रहा असर
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि समय पर राशन और मानदेय उपलब्ध नहीं कराया गया तो इसका सीधा असर बच्चों के पोषण स्तर और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ग्रामीणों एवं स्व सहायता समूहों ने शासन और प्रशासन से शीघ्र राशन आपूर्ति तथा लंबित मानदेय भुगतान की मांग की है, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
रेडी टू ईट में खिचड़ी के लिए घर से गेहूं एकत्र
जिला प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोषण आहार के रूप में रेडी टू ईट के लिए कच्चा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन शासन की ओर से पर्याप्त आवंटन न होने के कारण समूह से जुड़ी महिलाओं को अपने घर से गेहूं एकत्र कर खिचड़ी का वितरण करना पड़ रहा है। यह स्थिति पूरे जिले में बनी हुई है।
इनका कहना है…
मानदेय के बिल लगा दिए गए हंै। खाद्यान्न के लिए नागरिक आपूर्ति निगम के पास से सोसाइटी में राशन नहीं पहुंचा है, इसका आवंटन भोपाल से होता है। इसके लिए लिखा गया है। चार छह दिन में राशन और मानदेय दोनों ही समुहो को मिल जाएंगे।
राजा रंगीले, महिला बाल विकास अधिकारी हरदा

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