चौतरफा विकास की एक और बानगी, कंधे पर शव रखकर चले 20 किमी

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यूं तो जनप्रतिनिधि जिले में चौतरफा विकास के दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी तरफ इन दावों की असलियत भी समय-समय पर सामने आती रहती है। ऐसी ही एक और हकीकत उजागर हुई है जिसमें सड़क नहीं होने से एक शव को लेकर 20 किलोमीटर दूर तक ग्रामीणों और पुलिस कर्मियों को चलना पड़ा।
मामला बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी तहसील का है। यहां दानवाखेड़ा गांव में सड़क नहीं होने के कारण शव को पोस्टमार्टम के लिए पहुंचने के लिए शव को कंधे पर रखकर करीब 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। पोस्टमार्टम करने के बाद दोबारा घर ले जाने के लिए भी ग्रामीणों को शव को कंधे पर रखकर फिर 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।

विकास की पोल खोल रही तस्वीर
यह तस्वीर सरकार के विकास की पोल खोलती नजर आ रही है। जहां सरकार गांव-गांव पक्की सड़क का दावा करती है। वहीं घोड़ाडोंगरी तहसील के दानवाखेड़ा गांव से रामपुर तक करीब 10 किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण आज भी ग्रामीण कीचड़ भरी कच्ची सड़क से आवाजाही करते हैं। बारिश में तो कच्ची सड़क इतनी खराब हो जाती है कि गांव में कोई वाहन नहीं पहुंच पाता। ग्रामीण कई वर्षों से गांव में सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग आज भी मांग ही बनकर रह गई है।


नदी में डूबने से ग्रामीण की मौत
दानवाखेड़ा गांव में नदी में डूबने से उदन शाह 55 साल की मौत हो गई। जिसकी सूचना मिलने पर चोपना पुलिस मौके पर पहुंची। रामपुर से दानवाखेड़ा गांव तक करीब 10 किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं होने एवं बारिश के कारण कीचड़ होने के कारण गांव तक कोई नहीं पहुंच सका। जिसके कारण चोपना पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को कंधे पर उठाकर करीब 10 किलोमीटर सड़क तक रामपुर लाया।


पहली पत्नी के घर जा रहा था वृद्ध
चोपना थाना प्रभारी राकेश सरियाम ने बताया कि दानवाखेड़ा गांव निवासी उदन शाह 55 साल अपनी दूसरी पत्नी के घर से पहली पत्नी के घर जा रहा था। लेकिन वह घर नहीं पहुंचा। जिस पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। आसपास तलाश करने के बाद गांव के ही पास नदी में उसका शव मिला। जिसकी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे। गांव तक पहुंचाने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण जैसे-तैसे गांव तक पहुंचे। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से पुलिसकर्मी एसआई राकेश सरियाम, एएसआई राजेश कलाम, आरक्षक विवेक यादव, आशुतोष भोजने और 100 डायल के दीपक मालवी ने शव को कंधे पर उठाकर करीब 10 किलोमीटर दूर रामपुर तक शव को लाया गया। जिसके बाद रामपुर से शव को वाहन से घोड़ाडोंगरी अस्पताल लाया गया। जहां पर शव का पोस्टमार्टम कराया गया।


दो घंटे तक कंधे पर शव उठाकर चलते रहे
मृतक के भाई जगन सिंह ने बताया भाई की नदी में डूबने से मौत हो गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए घोड़ाडोंगरी अस्पताल लाना था। रामपुर से दानवाखेड़ा तक 10 किलोमीटर तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण शव को कंधे पर उठाकर 2 घंटे तक चलते रहे। रामपुर से शव को वाहन में रख घोड़ाडोंगरी अस्पताल लाया गया। वहीं वापस घर ले जाने के लिए दोबारा रामपुर से दानवाखेड़ा तक शव को कंधे पर रखकर ले जाना पड़ा।

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