विश्व आदिवासी दिवस पर किया जाए सार्वजनिक अवकाश घोषित- आदिवासी परिषद

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-राज्यपाल के नाम कलेक्ट्रेट में नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

अनोखा तीर, हरदा। शनिवार को आदिवासी परिषद ने आगामी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है। नायब तहसीलदार विजय साहू को सौंपे गए ज्ञापन में आदिवासी युवा प्रभाग परिषद के जिलाध्यक्ष लोकेश कलमें ने बताया कि मप्र आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है। जिसमें 3 करोड़ से अधिक आदिवासी रहते हैं। आदिवासियों की अनोखी सांस्कृतिक एकता, जल जंगल और जमीन को बचाने की भावना उन्हें दुनिया में विशेष बनाती है। उनका प्रकृति से जुड़ाव अविश्वसनीय है। बीते कई वर्षों में आदिवासियों के अस्तित्व और अस्मिता को भारी नुकसान हुआ है। जो दुनियाभर में चिंता का विषय बना गया था। जिसके संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में 23 दिसंबर 1994 को पारित प्रस्ताव के तहत हर साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस द इंटरनेशनल डे ऑफ द वर्ल्ड इंडीजीनस पीपल्स के रूप में घोषित किया था। जिसे समूचे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। 28 नवंबर 2020 को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 3 करोड़ से अधिक आदिवासियों की भावनाओं को देखते हुए शासकीय अवकाश घोषित किया गया था। हालांकि, 26 जनवरी 2021 को शासकीय अवकाश बंद कर दिया गया। कुछ चुनिंदा आदिवासी जिलों में स्वैच्छिक अवकाश कर दिया गया था। आदिवासी संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों की ओर से कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन सौपने के दौरान संभागीय अध्यक्ष एससी एसटी युवा संघ राहुल पवारे, सर्व आदिवासी महिला संगठन की जिलाध्यक्ष राखी करोची, अनिता दमाडे जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद अध्यक्ष, विवेक सल्लाम, सतीश पंदराम, बाबूलाल उईके, राजेश भल्लावी, पवन कलम, राजा टेकाम,अश्विन उईके, राजकुमार मसकोले, दुर्गेश टेकाम, संदीप काकोड़िया, शिवम उईके, संदीप इवने, नरेंद्र उईके,मुकेश भल्लवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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