मौसम परिवर्तन होते ही शुरु हो जाती है बीमारियां

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अनोखा तीर, हरदा। इन दिनों बारिश का मौसम चल रहा है। कभी गर्मी, उमस तो कभी बारिश से ठंडी हवाएं चल रही है। दिन भर में कई बार मौसम करवटे बदलता रहता है। ऐसे में बीमारियों का खतरा भी बड़ जाता है। मौसम परिवर्तन से होने वाली बीमारियों की चपेट में अधिकतर बच्चे आते है। इस समय अस्पतालों में ज्यादातर सिर दर्द, बुखार, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों से ग्रसीत बच्चे देखने को मिल रहे है। बारिश के मौसम में डेंगू, बुखार, पीलिया भी बहुत फैलता है और संक्रमण की संभावनाएं भी बड़ जाती है। बारिश के मौसम में बच्चों में कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती है, उनके क्या लक्षण होते है और इन बिमारियों से बच्चों को किस तरह बचाया जा सकता है। इन सभी बातों पर विशेष चर्चा डॉ. सनी जुनेजा, शिशु रोग स्पेशलिस्ट से की गई। डॉ.जुनेजा ने बताया कि साल भर में बारिश के मौसम के यह तीन महिने बच्चों के स्वास्थ्य पर बहुत ही जल्दी असर दिखाते है। पांच साल तक के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। जिसके कारण इस मौसम में बच्चें सबसे ज्यादा बीमारी की चपेट में आते है।

बारिश के मौसम में डेंगू बुखार की शिकायत सबसे ज्यादा आती है, अभी बारीश का मौसम शुरू ही हुआ है और यह शिकायत बच्चों में देखने को मिल रही है। डेंगू बुखार से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए घर के आसपास बारिश का पानी न भरने दे। पानी भरा होने से मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखे। बच्चों को उबला हुआ पानी पिलाएं। बारिश के महिनों में बच्चों को पीलिया की बीमारी भी देखने को मिलती है। पीलिया बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले बच्चों को नंगे पैर न रहने दे । बच्चा यदि घर पर है तो भी उसे चप्पल पहना कर रखें। बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक भोजन कराए। घर में यदि कोई पीलिया से ग्रसित है तो उससे दूरी बना कर रखें। बच्चों को उसके संपर्क में न आने दे। उबला हुआ पानी पिलाए। डॉक्टर की सलाह लें। बारिश के मौसम में अन्य बिमारीयां जो बच्चों में देखने को मिलती है उल्टी, दस्त, बुखार, सर्दी, जुखाम जैसी बीमारियों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता को बच्चों का विशेष ध्यान देना चाहिए। कई बार बच्चों के पालक उन्हें दूध पिलाकर ही स्कूल भेज देते है, ऐसा नहीं करना है बच्चों को पोष्टिकनाश्ता देकर ही स्कूल भेजे। जितना हो सके उबला हुआ पानी पीने को दें। साफ-सफाई रखें। ताजा और पोष्टिक भोजन ही दे। बच्चों के बीमार होने पर डॉक्टर को दिखाए।

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