जिला चिकित्सालय में मरीजों से लूटपाट

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अनोखा तीर, हरदा। जिला चिकित्सालय में यदि कोई भी ऑपरेशन या गंभीर बीमारी का इलाज करवाना हो तो यह काम बिना पैसों के नहीं होता है। हालांकि निजी चिकित्सालयों से तो कम पैसे लिए जाते हैं, लेकिन जो बिल्कुल गरीब हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ा जाता। यदि कोई गरीब पैसा देने में आनाकानी करता है तो उसे गंभीर बताकर रिफर कर दिया जाता है। सबसे अधिक परेशानियों का सामना गर्भवति महिलाओं को करना पड़ता है। क्योंकि यहां जिला चिकित्सालय में जो महिला चिकित्सक है, उसके लालच की कोई सीमा ही नहीं है, उसके पास जब कोई महिला गर्भावस्था दौरान इलाज कराने जिला चिकित्सालय पहुंचती है तो उसे उस महिला चिकित्स के प्राईवेट क्लिीनिक में प्रति माह सोनोग्राफी और अन्य जांचों के लिए बाध्य किया जाता है। इसके पश्चात जब प्रसव का समय नजदीक आता है तो उस महिला और परिजन को इतना डराकर कहा जाता है कि आपको प्रसव ऑपरेशन द्वारा ही करवाना पड़ेगा, निजी चिकित्सालय में जाओगे तो 50 हजार से अधिक खर्च आएगा, इससे अच्छा है कि हम जिला चिकित्सालय में ही ऑपरेशन कर देंगे, आपको मात्र 10 हजार रुपए ही देना पड़ेंगे। जिला चिकित्सालय में पदस्थ इस महिला चिकित्सक ने अपने इस ऑपरेशनरूपी धंधे के लिए दलालों की नियुक्ति भी की है, जो इस महिला चिकित्सक के लिए ग्राहक ढूंढकर लाती हैं। जिला चिकित्सालय में कम दामों पर ऑपरेशन का खेल सिर्फ गर्भवति महिलाओं के लिए ही सीमित नहीं है, यहां दूसरे भी छोटे बड़े ऑपरेशन बिना किसी राशि के नहीं किए जाते हैं।

जिला चिकित्सालय में कम घर पर देते हैं ज्यादा समय

 

जिला चिकित्सालय में पदस्थ कुछ चिकित्सकों के निवास चिकित्सालय परिसर में ही स्थापित हैं। यहीं पर ही उन्होंने अपने निजी क्लीनिक बना रखे हैं। इन चिकित्सकों के लिए डॉयलिसिस यूनिट का रास्ता किसी वरदान से कम नहीं है। जैसे ही क्लीनिक में कोई मरीज आता है तो उसी रास्ते से तत्काल चिकित्सक अपने क्लीनिक में जिला चिकित्सालय के मरीजों को छोड़कर पहुंच जाती हैं, यदि कोई अधिकारी जिला चिकित्सालय में आकर जांच करता है तो तत्काल पिछले गेट से वापस चिकित्सालय में आ जाती हैं।

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